लुधियाना के जगराओं में सुखवीन अस्पताल में डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी की। 92 साल का एक बुजुर्ग पेट में दर्द और यूरिन पास न होने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने बुजुर्ग का चेकअप किया तो पता चला कि उसके यूरिन ब्लेडर में 85 MM की फूल जैसी पथरी फंसी है। पथरी की वजह से बुजुर्ग का यूरिन पास नहीं हो पा रहा। डॉक्टरों के मुताबिक बुजुर्ग का यूरिन ब्लेडर पूरी तरह से भरा था और वो किसी भी समय फट सकता था। ऐसे में बुजुर्ग की सर्जरी करने के अलावा कोई चारा नहीं था। अस्पताल के डॉक्टरों ने बुजुर्ग की ओपन सर्जरी करने का फैसला किया। यूरोलॉजिस्ट डॉ दिव्यांशु ने बताया कि ऑपरेशन से पहले के प्रोटोकॉल पूरे किए गए। बीपी, हार्ट रेट चेक किए तो ऐज के मुताबिक ठीक पाए गए। फिर मरीज की कंसेंट ली गई और सर्जरी शुरू की। करीब पौने घंटे तक सर्जरी चली और मरीज के यूरिन ब्लेडर से पथरी निकाल दी गई। पहली बार निकाली इतनी बड़ी पथरी डॉ दिव्यांशु का कहना है कि उन्होंने इससे पहले कभी इतनी बड़ी पथरी नहीं निकाली। इससे पहले वो 30MM तक की पथरी निकाल चुके हैं। उन्होंने बताया कि सामान्यतः: लाेग 10 एमएम से ऊपर की पथर निकाल देते हैं। बुजुर्ग गरीब थे तो वो 15 साल से पथरी लेकर चल रहे थे। राम रतन 15 साल से जूझ रहे थे बुजुर्ग राम रतन सिंह अयाली कलां के रहने वाले थे। वो 15 साल से पथरी के दर्द से जूझ रहे थे। गरीबी के कारण वो समय पर इसकी जांच नहीं करवा सके और दवाइयों के सहारे काम चलाते रहे। पथरी बढ़ती गई और अब करीब 1 महीने से यूरिन पास होने में दिक्कत हो रही थी। तब जाकर वो अस्पताल में पहुंचे। आयुष्मान योजना के तहत कवर हैं बुजुर्ग डॉ. दिव्यांशु गुप्ता ने बताया कि राम रतन सिंह आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत कवर थे, जिसमें उन्हें सालाना 5 लाख रुपए का हेल्थ कवर था। अब उनकी इंश्योरेंस MMSBY में अपग्रेड हो गई है। ऐसे में बुजुर्ग की इस सर्जरी में उनका एक भी पैसा नहीं लगा। बुजुर्ग की सर्जरी इन तीन कारणों से थी जटिल, जानिए ऐज फैक्टर: डॉ दिव्यांशु ने बताया कि बुजुर्ग का ऐज फैक्टर सबसे बड़ी चुनौती थी। 92 साल की उम्र में सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। बीपी, शुगर और हार्ट रेट मेंटेन रखना इस उम्र में बेहद मुश्किल हो जाता है। ऑपरेशन से पहले बुजुर्ग के टेस्ट किए तो वो सर्जरी प्रोटोकॉल में थे। पथरी का साइज: डॉ दिव्यांशु बताते हैं कि इस सर्जरी में दूसरी बड़ी चुनौती पथरी का साइज था। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी पथरी को दूरबीन से रिमूव करना संभव नहीं था। इसे न ही यूरिन पाइप के जरिए रिमूव किया जा सकता था। ओपन सर्जरी के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इस उम्र में ओपन सर्जरी करना किसी खतरे से खाली नहीं था। एनेस्थिसिया के बाद होश में लाना: डॉ का कहना है कि इस उम्र में एनेस्थिसिया की डोज देने के बाद उन्हें वापस होश में लाना तीसरी बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन करने के बाद बुजुर्ग को लगातार टीम ने ऑब्जर्व किया और कुछ देर बाद वो होश में आ गए। शाम तक वो बातें करने लग गए।