नर्मदा नहर सिंचाई परियोजना गुड़ामालानी क्षेत्र में इस वक्त लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। लाखों रुपए के सालाना रखरखाव और पेट्रोलिंग टेंडर जारी होने के बावजूद, नहर से निकलने वाली डिग्गियां और वितरिकाएं वर्षों से रेत, मिट्टी और बबूल की झाड़ियों से अटी पड़ी हैं, इसके चलते टेल क्षेत्र के किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सिंचाई सीजन में जीरा, इसबगोल, सरसों, गेहूं की खेती के चरम पर होने के बावजूद टेल क्षेत्र के काश्तकार दस साल से पानी के लिए निजी खर्च पर मोटर लगाने को मजबूर हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि नर्मदा परियोजना की ओर से न तो नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है और न ही समय पर रखरखाव हो रहा है। उनका कहना है कि पिछले दो–तीन सालों से कई जगह नहरों व वितरिकाओं की सही ढंग से सफाई ही नहीं हुई, जबकि हर साल साफ-सफाई व मॉनिटरिंग के लिए लाखों रुपए के टेंडर जारी होते हैं। वितरिकाओं व डिग्गियों में झाड़ियां उगी, नहर का पानी छोड़ने पर टेल एंड तक नहीं पहुंच रहा गुढ़ा खास माइनर की 4 और 5 नंबर डिग्गियों की पड़ताल के दौरान सामने आया कि बबूल की झाड़ियां और गंदगी से भरी नजर आई। वितरिकाओं की सफाई किए बिना ही पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे जल प्रवाह बाधित हो रहा है। किसान पूनमाराम खिलेरी ने बताया कि जब नहर में पानी भेजा जाता है, तब विद्युत विभाग द्वारा अक्सर विद्युत आपूर्ति बंद कर दी जाती है। ऐसे में किसान निजी खर्चे पर भी मोटर चलाकर पानी का उपयोग नहीं कर पाते, जिससे पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। भादराई लिफ्ट वितरिका सिस्टम के संचालन और पेट्रोलिंग के लिए डेजर्ट डेवलपमेंट कंस्ट्रक्शन कंपनी को 12 लाख 50 हजार रुपए का वर्क ऑर्डर 20 नवंबर को जारी किया गया था। इसके बावजूद, डिग्गियां और वितरिकाएं बदहाल है। किसानों ने चेतावनी दी है कि टेल तक पानी नहीं पहुंचने से रबी फसलों का उत्पादन सीधे प्रभावित हो रहा है। “वर्तमान में सिस्टम के सभी क्षेत्रों में पानी सुचारू रूप से पहुंचाया जा रहा है। सफाई का टेंडर अभी जारी नहीं हुआ है, केवल पेट्रोलिंग और रेगुलेशन से संबंधित टेंडर जारी किया गया है, जिसके तहत जेसीबी का 120 घंटे का कार्य निर्धारित है। जहां आवश्यकता पड़ती है, वहां नहर से रेत कचरा निकाला जा रहा है। 40 प्रतिशत जमीन के लिए पानी आपूर्ति का प्रावधान है।” – रघुनाथराम विश्नोई, एक्सईएन, नर्मदा नहर गुड़ामालानी