सड़क पर गाड़ी उतारते ही अगर आपके अंदर का माइकल शूमाकर जाग जाता है, सड़क को आप फॉर्मूला वन का रेसिंग ट्रैक समझने लगते हैं। शहर की कोई रेड लाइट आपको रोक नहीं पाती और गलत साइड से गाड़ी चलाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं और हेलमेट या सीटबेल्ट लगाना आपकी आन-बान-शान के खिलाफ है, तो भाई साहब आप भी उन्हीं लोगों में शुमार हैं, जो टशन में अपनी जेब पर कैंची चलाने पर आमादा रहते है। जी नहीं, हम एक्सीडेंट के बाद अस्पताल के खर्चों की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हर साल ऑटो इंश्योरेंस रीन्यू कराते समय, आपकी जेब से जो एक्स्ट्रा पैसे जाते हैं उसकी बात कर रहे हैं।
