राजस्थान में जमीनों से जुड़े मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां रेवेन्यू कोर्ट्स में 6.72 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं। इनमें से करीब 64 फीसदी मामले केवल एसडीएम स्तर पर ही अटके हुए हैं। हालात यह हैं कि कई कोर्ट में पूरे साल में सिर्फ एक ही केस का निपटारा हो पा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, जमीनों से जुड़े विवादों का निपटारा होने में हो रही देरी के कारण सरकार और रेवेन्यू कोर्ट पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। कोर्ट में काम के हालात ये है कि कई तो ऐसे है जहां पूरे साल में एक ही केस का डिस्पोजल कर पा रहे है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान समय में राज्य के विभिन्न रेवेन्यू कोर्ट (राजस्व मंडल और अधीनस्थ राजस्व कोर्ट) में 6.72 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग है। इस पेंडेंसी के पीछे सबसे बड़ा कारण कर्मचारियों की प्रोपर ट्रेनिंग न होना और कोर्ट में स्टाफ की कमी बताया जा रहा है। पिछले दिनों सर​कार के स्तर पर हुई एक रिव्यू बैठक में ये रिपोर्ट रखी गई। इसमें बताया गया कि राजस्थान में रेवेन्यू कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले पेंडिंग है। इनकी संख्या 6 लाख 72 हजार से ज्यादा है। कोर्ट वाइज देखें तो सबसे ज्यादा करीब 4.33 लाख से ज्यादा मामले तो केवल एसडीएम कोर्ट में ही पेंडिंग चल रहे है, जो कुल पेंडेंसी का 64 फीसदी से ज्यादा है। केस लंबित होने ये है तीन बड़े कारण सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में कोर्ट केसेज के लंबित होने के पीछे कुछ कारण भी बताए है। इसमें सबसे बड़ा कारण कोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों का प्रशिक्षित न होना है। अधिकांश कर्मचारी जो रेवेन्यू कोर्ट या अधीनस्थ कोर्टों में लगे हैं, उन्हें कोर्ट में काम करने का अनुभव या तो कम है या उन्हें प्रोपर ट्रेनिंग नहीं दी गई है। इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण कोर्ट से जारी नोटिस, आदेशों को तामिल करने में हो रही देरी मान रहे है। अक्सर कोर्ट में लगे केसों पर सुनवाई में देरी का बड़ा कारण पक्ष या विपक्ष को तामिल होने वाले नोटिस में देरी होना है। इसी तरह तीसरा बड़ा कारण कोर्ट में लगने वाले केसों की मौका रिपोर्ट में होने वाली देरी है। अक्सर केस लगने के बाद मौके की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों से मांगी जाती है, तो उसके लिए तहसीलदार, पटवारी या अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट में देरी को माना है। 2.17 लाख मामले 5 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग इन रेवेन्यू कोर्ट में लंबित केसों में करीब 2.17 लाख केस ऐसे है, जो पिछले 5 साल या उससे भी ज्यादा समय से पेंडिंग चल रहे है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1.34 लाख से ज्यादा केस (5 से 10 साल की अवधि से), 75 हजार से अधिक केस ऐसे (10 से 20 साल की अवधि) और 6 हजार से ज्यादा केस (20 से 30 साल की अवधि) और 330 से ज्यादा केस ऐसे है, जो 30 साल या उससे ज्यादा समय से पेंडिंग है। पूरे साल में केवल एक ही केस का डिस्पोजल कोर्ट में केसों की पेंडेंसी के हालात कितने बुरे हैं ये रिपोर्ट में भी सामने आया है। कुछ कोर्ट तो ऐसी है, जहां पूरे साल में केवल एक ही केस का डिस्पोजल हुआ है। इसमें एसडीओ कोर्ट सादूलशहर (गंगानगर), सहायक कलेक्टर कोर्ट टोंक और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (SDM) कोर्ट फलोदी शामिल है। इन दोनों ही कोर्ट में बीते एक साल वित्तवर्ष (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक) में केवल एक-एक केसों का ही डिस्पोजल हुआ है।