मरुस्थल में बसे लोगों से ज्यादा पानी का मोल कोई नहीं जान सकता। इन्हीं में से एक हैं बाड़मेर जिले के झाक निवासी किसान देवाराम पंवार। गर्मियों में यहां का तापमान 50 डिग्री तक जाता है। ऐसे में पानी का भी आभाव हो तो मुश्किलें और बढ़ जाती है। ऊपर से भूजल निकला मगर बेहद खारा। जांच पर टीडीएस 5700 आया। मगर युवा किसान पंवार ने इसका तोड़ निकाल लिया। वे बारिश में न केवल मीठा पानी एकत्र कर रहे हैं बल्कि उसी से गूगल और ग्वारपाठा जैसी औषधीय फसलों की खेती तक कर रहे हैं। भेड़ बकरियों व मकान के लिए बनाए गए 20 हजार स्क्वेयर फीट की छत को फार्म पौंड से जोड़ा हुआ है। दो फार्म पौंड में 42 लाख लीटर वर्षा जल सहेज चुके हैं। खेत में 300 खेजड़ी के पौधे लगाए। साथ ही लुप्त होती औषधीय प्रजाति गूगल के 500 पौधे भी रोपे। बारिश के दौरान सिंचाई की जरूरत कम रहती है, जबकि रबी में उसी पानी से सिंचाई कर रहे हैं। क्षेत्र में पूरे साल में 300 मिमी बारिश ही होती है लेकिन इन्होंने कम पानी में कृषि और पशुपालन का सफल मॉडल बनाया है। इको टूरिज्म क्षेत्र में भी जाएंगे किसान ने बताया- आने वाले समय में इको टूरिज्म के क्षेत्र में जाएंगे। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक कुआं बाटाडू और लोक देवता बाबा रामदेवजी की जन्मस्थली- रामदेरिया से 12 किलोमीटर दूरी पर गांव है। ऐसे में यहां धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा। कभी चिमनी की रोशनी में पढ़ाई की मगर आर्थिक स्थिति के कारण कक्षा 11वीं में ही बीच में छोड़नी पड़ी। फिर पत्राचार से धीरे–धीरे बीए की। मगर रोजगार फिर भी नहीं था। कोरोना में औषधि फसलों की खेती करने का विचार आया। स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के सहयोग से 1 हेक्टेयर खेत में गूगल के पौधे लगाए। सहजन, एलोवेरा, तुलसी, गिलोय, सनाय का भी पौधरोपण किया। खेजड़ी के 300 पौधे भी लगाए। औषधीय खेती के साथ बकरी पालन से आय का स्रोत बनाने का निर्णय लिया। कृषि विज्ञान केंद्र गुडामालानी व एआरसी बीकानेर से प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 525 बकरियों के लिए आवेदन किया। इसके परिणामस्वरूप बाड़मेर जिले के प्रथम लाभार्थी बने। सिरोही, सोजत, मारवाड़ी नस्ल की बकरियां, मारवाड़ी, अविशान नस्ल की भेड़, थारपारकर गाय, प्रतापधान मुर्गियां भी हैं। मरुस्थलीय किसान व पशुपालन वाले युवा के रूप में उभरने पर केंद्र सरकार ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले के कार्यक्रम में आमंत्रित किया। हाल ही में राजस्थान सरकार ने डेनमार्क में सात दिवसीय कृषि व पशुपालन प्रशिक्षण के लिए भेजा। बकरी के दूध, एलोवेरा व नीम साबुन का निर्माण भी कर रहे हैं। थार शोभा और लोकल खेजड़ी में अभी उत्पादन शुरू नहीं हुआ है। गूगल में 8 साल बाद उत्पादन मिलता है।
