रूस के मास्को में पढ़ाई करने गए बीकानेर के अजय गोदारा की रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत हो गई। 10 दिसंबर को परिवार को पता चला कि अजय की मौत हो गई। बुधवार को परिवार के लोग दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शव लेकर गांव पहुंचे, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। अरजनसर गांव निवासी अजय गोदारा की 22 सितंबर को परिवार वालों से आखिरी बार बात हुई थी। इस दौरान उसने कहा था कि मुझे जबरन युद्ध के मैदान में उतारा गया है। उसने 2 वीडियो भी परिवार को भेजे थे, जिसमें वो सेना की वर्दी में नजर आ रहा था। उसने कहा था कि मैं युद्ध में जा रहा हूं। अगर अब मेरा कॉल नहीं आए तो समझ लेना मेरी मौत हो गई है। परिवार वाले बोले- शव पूरी तरह सड़ गया
परिवार के लोगों ने बताया- हमें बेटे का शव बड़ी बेकद्री हालत में मिला है। अजय की मौत कब और कैसे हुई, इसके बारे में हमें नहीं बताया गया है। अजय का शव पूरी तरह से सड़ चुका था। चेहरा दिखाकर उसे दोबारा ढक दिया गया। ऐसा लग रहा था कि शव काफी पुराना हो चुका है। लैंग्वेज कोर्स में लिया था एडमिशन
अजय नवंबर 2024 में मास्को में लैंग्वेज की पढ़ाई करने गया था। उसने 11 सितंबर 2025 को 2 वीडियो परिवार को भेजे थे। इसमें अजय ने बताया कि नवंबर के बाद उन्हें और उनके कुछ दोस्तों को रूसी सरकार ने एक ट्रेनिंग के लिए भेजा। ट्रेनिंग के बाद उन्हें युद्ध के लिए रवाना कर दिया था। वीडियो में उसने बताया था- वह अभी यूक्रेन में है। तीन महीने की ट्रेनिंग लेने की बात कहते हुए कहा गया था कि हर हाल में युद्ध के मैदान में उतरना होगा। 9 भारतीय स्टूडेंट्स को भी ट्रेनिंग दी गई थी। जब ट्रेनिंग लेने से मना किया तो रूसी सेना के जवानों ने साफ कह दिया कि आप यूक्रेन की जमीन पर हो। आगे कोई सुनने वाला नहीं है, एक बार परिवार से बात कर लो। आशंका है कि ये मेरा लास्ट वीडियो हो। एक वीडियो में कहा था- हमारे साथ धोखा हुआ है
दूसरे वीडियो में अजय ने कहा था- हमारे ऊपर हवाई फायर हुए हैं। मिसाइलें दागी गई हैं। हम 4 बंदे थे, जिसमें एक तो वहीं खत्म हो गया। दो भाग गए और मैं रास्ता भटक गया। 8 दिन बाद मेरी बटालियन ने ढूंढ़कर अब सेना को सौंपा है, जो अभी सेलिडोज सिटी के अंदर है। ये सिटी भी यूक्रेन में है। यहां रूस ने कब्जा कर रखा है। अभी तय नहीं है कि मुझे वापस आगे भेजेंगे या यहीं पर रखेंगे। हमारे साथ धोखा हुआ है। बेटे का वीडियो आने के बाद परिवार के लोग परेशान थे
बेटे का वीडियो सामने आने के बाद परिवार के लोग परेशान हो गए थे। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। परिवार वाले उसे भारत लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। इस दौरान परिजनों ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी बात की थी। 10 दिसंबर को परिवार के पास रूस से फोन आया, जिसमें बताया कि अजय का शव जल्द ही उनके पास भेज दिया जाएगा।