राजस्थान में दंगा प्रभावित या तनावग्रस्त इलाकों में हिंदू-मुस्लिम बिना परमिशन के एक दूसरे को प्रॉपर्टी नहीं बेच पाएंगे। बेचने से पहले कलेक्टर से मंजूरी लेना जरूरी होगा। नियम तोड़ने पर कलेक्टर सौदा कैंसिल कर सकता है और प्रॉपर्टी भी सीज हो सकती है। प्रदेश में एक धर्म के लोगों का पलायन रोकने के लिए ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट’ को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। अब अगले सप्ताह विधानसभा में होने वाले बजट सत्र में बिल पेश किया जाएगा। इसके बाद इसे कानूनी रूप देने की तैयारी की जाएगी। गुजरात में यह कानून पहले से लागू है। वहीं, इसके कुछ प्रावधान नगालैंड, असम, मणिपुर व अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी लागू हैं। इस कानून को लागू करने वालों में गुजरात के बाद राजस्थान का नाम शामिल करने की तैयारी है। अब इस एक्ट को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे- राजस्थान में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? सेंसेटिव एरिया में रहने वाले अपनी प्रॉपर्टी कैसे बेच पाएंगे? एक्ट में किस तरह के प्रावधान होंगे? नहीं मानने पर कितने साल की सजा होगी? भास्कर ने लीगल और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से ऐसे ही सवालों के जवाब जाने। सवाल : ‘डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट’ क्या है और इसके प्रावधान क्या हो सकते हैं?
जवाब : कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राजस्थान विधानसभा में ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल’ लाया जाएगा। यहां पारित होता है, तो राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ये कानून का रूप ले लेगा। जब ये कानून का रूप ले लेगा, तब उसके प्रावधानों के तहत किसी क्षेत्र में दो समुदायों के बीच दंगा-फसाद होता रहता है या ऐसी कोई आशंका रहती है, कलेक्टर उसे डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेंगे। उस क्षेत्र में कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ प्रॉपर्टी का सीधे सौदा नहीं कर पाएगा। पहले उसे जिला कलेक्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। सूत्रों के अनुसार इस बिल में कहीं भी हिंदू या मुस्लिम या किसी समुदाय का जिक्र नहीं होगा। लेकिन दोनों तरह की मेजोरिटी (हिंदू या मुस्लिम) को संबंधित डिस्टर्ब एरिया में घर बेचने से पहले कलेक्टर से परमिशन लेनी होगी। वहीं, किसी इलाके में चाहे मुस्लिम मेजोरिटी में हों या हिंदू मेजोरिटी में हों, तब भी यही प्रोसेस फॉलो करना होगा। सूत्रों के अनुसार इस बिल में ये मुख्य प्रावधान होंगे… सवाल : गुजरात के जैसे राजस्थान में भी इस कानून की जरूरत है क्या?
जवाब : एक्सपट्र्स के अनुसार डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट का उद्देश्य दंगा प्रभावित क्षेत्रों से पलायन रोकने, जबरन या किसी डर से संपत्ति के होने वाले सौदों को रोकने आदि से है। एक्सपट्र्स के अनुसार जयपुर सहित अन्य जिलों में भी कहीं न कहीं दंगे भड़क जाते हैं। वहीं पलायन होने के मुद्दे भी बार-बार उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार संबंधित क्षेत्रों की प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त के मामलों में अपनी निगरानी रखना चाह रही है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो दबाव में या डर से अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। गुजरात में भी संबंधित एक्ट के पीछे सरकार का मकसद दंगों की वजह से पलायन को रोकना था। इधर, सरकार का भी तर्क है कि इस एक्ट को केवल मुस्लिमों के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। ये सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा। यदि कलेक्टर ने संबंधित क्षेत्र को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया है, तो वहां हिंदू भी मुस्लिम से प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकेगा। सवाल : कलेक्टर कैसे तय करेगा कि संबंधित क्षेत्र एक डिस्टर्ब्ड एरिया है?
जवाब : सूत्रों के अनुसार एक्ट के प्रावधानों के तहत डिस्टर्ब्ड एरिया तय करने के लिए अमूमन उस इलाके में सांप्रदायिक दंगों का इतिहास देखा जाएगा। गुजरात में भी इसी तरह से स्थानीय प्रशासन (कलेक्टर) संबंधित एरिया को डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित करता है। गुजरात में हर 5 साल में एक बार डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट में संशोधन किया जाता है। सवाल : यदि कानून बनने के बाद प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत नहीं ली, तो क्या कार्रवाई हो सकती है?
जवाब : बिना इजाजत के संपत्ति बेचने का सौदा किया, तो डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट के तहत दोनों पर केस दर्ज हो सकेगा। कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की जेल होने के प्रावधान इस कानून में लागू हो सकते हैं। साथ ही प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रद्द कर दी जाएगी। हालांकि इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर कलेक्टर के आदेश पर डील रद्द हो गई है, तो प्रॉपर्टी का खरीदार हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकता है। इसके बाद जज इस मामले पर फैसला सुना सकते हैं। गुजरात में ऐसे कई मामलों में वहां हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सवाल : गुजरात में हिंदू महिला की प्रॉपर्टी क्या इसी एक्ट के तहत सीज हुई थी, मामला क्या था?
जवाब : गुजरात में डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट, 1991 लागू है। साल 1986 में गुजरात विधानसभा में इसका विधेयक पेश किया गया और 1991 में यह कानून बना। सरकारी दस्तावेज में इस एक्ट का पूरा नाम ‘द गुजरात प्रॉहिबिटेशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम इविक्शन फ्रॉम प्रिमिसिस इन डिस्टर्ब एरिया एक्ट’ है। इस एक्ट के तहत सूरत कलेक्टर ने सलाबतपुरा एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया हुआ था। मामले के तहत जून 2025 में सूरत में एक हिंदू महिला अपनी प्रॉपर्टी किसी मुस्लिम महिला को बेच रही थी। इसका एडवांस पैसा भी ले लिया था। सोसाइटी के लोगों को खरीदार से ही आपत्ति थी। वे नहीं चाहते थे कि कोई संबंधित धर्म का खरीदार सोसाइटी में आकर रहे। सौदे की शिकायत सोसाइटी के लोगों ने ही कलेक्टर तक पहुंचा दी। प्रॉपर्टी की मालिक अपने फैसले पर अड़ी रही। उसने सौदे का पूरा पैसा ले लिया। इसके बाद उसने प्रॉपर्टी बेचने के डॉक्यूमेंट्स तैयार करवाए। शिकायत के बाद सूरत कलेक्टर ने डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट यानी अशांत क्षेत्र अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर प्रॉपर्टी सील कर दी। साथ ही सौदे पर रोक लगा दी थी। एक्सपर्ट का मानना है कि यह मामला तो सोसाइटी के अन्य निवासियों की अपनी राय या इच्छा पर आधारित था। शायद वहां संबंधित हिंदू महिला के पलायन जैसी स्थिति नहीं थी। सवाल : क्या सरकार के इस कदम के पीछे कोई राजनीति छिपी हुई है?
जवाब : एक्सपट्र्स के अनुसार बीजेपी को गुजरात में जिस तरह की सफलता मिली और उसके बाद देश में और यूपी सहित अन्य राज्यों में, उसके पीछे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों का बड़ा योगदान है। बीजेपी की राजनीति को ऐसे मुद्दे सूट करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जयपुर की वॉल सिटी हो या अजमेर का दरगाह क्षेत्र, यहां हिंदुओं ने मकान खाली किए हैं और मुस्लिमों ने खरीदे हैं। पलायन एक बड़ा मुद्दा रहा है। यदि कानून वाकई पलायन को रोकता है, तो उद्देश्य पर कोई शंका नहीं रहेगी। लेकिन एक आशंका और है कि डिस्टर्ब एरिया में संपत्ति खरीद-फरोख्त के लिए सरकारी मशीनरी से मंजूरी लेने के मामले में कहीं नए भ्रष्टाचार को हवा न मिल जाए। मंजूरी के लिए ‘दक्षिणा’ का चलन कहीं भी किसी से छिपा हुआ नहीं है। गुजरात के डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट में धर्म का सीधा जिक्र नहीं है। इसमें दंगा, भीड़ की हिंसा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कई एक्टिविस्ट मानते हैं कि इस एक्ट के जरिए मुसलमानों को कुछ क्षेत्रों तक सीमित किया जा रहा है। … यह खबर भी पढ़ें… एक धर्म के लोगों का पलायन रोकने कानून लाएगी राजस्थान-सरकार:अल्पसंख्यक इलाकों को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकेगी, प्रॉपर्टी बेचने पर रहेगी रोक
