राजस्थान सरकार अगले महीने पेश होने वाले बजट की तैयारियों में जुटी है। ये भजनलाल सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट (2026-27) होगा। एक्सपट्‌र्स का कहना है कि रिफाइनरी से मिलने वाले बड़े रेवेन्यू और बढ़ते टैक्स रेवेन्यू के कारण बजट में 20% बढ़ोतरी की जा सकती है। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट हो सकता है। बजट में डेढ़ लाख सरकारी नौकरियाें, 25 लाख लखपति दीदी के साथ राम जल सेतु लिंक प्रोजेक्ट और 9 ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। केंद्र सरकार की ओर से 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी के बाद राज्य के कर्मचारियों को भी पे-कमीशन गठित होने की आस जगी है। बजट में महिलाओं, इंडस्ट्रीज, निवेशकों, किसानों का भी ध्यान रखा जाएगा। वहीं फ्री बिजली पर सरकार कड़ा फैसला भी ले सकती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पिछले बजट में सवा लाख सरकारी नौकरियाें की घोषणा की थी
राज्य सरकार ने 5 साल के कार्यकाल में 4 लाख सरकारी नौकरियाें का वादा किया है। पिछले बजट में सवा लाख सरकारी नौकरियाें की घोषणा की थी। उसमें से 92 हजार दे दी हैं और 20 हजार पदों पर नियुक्तियां देने की प्रक्रिया जारी है। CMO के निर्देश पर सभी सरकारी विभाग की ओर से खाली पदों की लिस्ट बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बजट में सरकार डेढ़ लाख सरकारी नौकरियाें की घोषणा कर सकती है। RPSC और कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) को इसकी तैयारी रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। संबंधित नौकरियों के विभागवार पद कितने होंगे, कार्मिक विभाग ने इसकी तैयारी के लिए एक पूरा ब्योरा राज्य सरकार के सामने रख दिया है। RPSC में फिलहाल 18 हजार वैकेंसी को लेकर भर्ती प्रक्रिया जारी है। बजट पेश होने के बाद अगले वित्तीय वर्ष में इससे दोगुने पदों पर भर्ती करने की तैयारी की जा रही है। RSSB सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रिया और नई भर्तियां जिनकी आने वाले महीनों में विज्ञप्तियां जारी की जाएंगी, उन संख्या को जोड़ें, तो 80 हजार भर्तियां करने की तैयारी है। सबसे ज्यादा नौकरियां शिक्षा विभाग में
सूत्रों के अनुसार, बजट पेश होने के बाद युवाओं को प्रत्येक महीने एक न एक प्रतियोगी परीक्षाओं का विज्ञापन देखने को मिलेगा। इनमें सर्वाधिक नौकरियां शिक्षा विभाग में होंगी। इसके अलावा पुलिस, चिकित्सा, जलदाय (पेयजल), वन, पीडब्ल्यूडी और कृषि विभाग के लिए भी भर्तियां निकाली जाएंगी। सोलर पैनल का सब्सिडी लेने वालों को 100 यूनिट फ्री बिजली नहीं मिलेगी!
राज्य सरकार सोलर पैनल की सब्सिडी देने के बाद संबंधित उपभोक्ताओं को मिल रही 100 यूनिट फ्री बिजली पर फैसला ले सकती है। एक्सपट्‌र्स के अनुसार, राज्य सरकार किसी भी उपभोक्ता के लिए 100 यूनिट फ्री बिजली देना तब तक बंद नहीं कर सकती, जब तक की इस संबंध में वह किसी तरह का कोई प्रस्ताव नहीं लेकर आ जाती। ऐसे में सरकार को बजट में तस्वीर साफ करनी होगी कि जिन उपभोक्ता को सोलर पैनल के लिए सब्सिडी मिल गई है, उन्हें 100 यूनिट बिजली का लाभ भविष्य में नहीं मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार बजट में ये प्रावधान कर सकती है। राजस्थान सरकार ने पिछले बजट में हर महीने 150 यूनिट फ्री बिजली देने की योजना के तहत वन टाइम सोलर पैनल के लिए सब्सिडी देने की घोषणा की थी। राज्य सरकार की मंशा है कि सोलर पैनल अपने आप करीब 150 यूनिट फ्री बिजली बनाएगा और सरकार पर हर महीने फ्री बिजली देने वाला बोझ हट जाएगा। पिछले महीने (दिसंबर 25) से राजस्थान सरकार ने सोलर पैनल पर सब्सिडी देना शुरू भी कर दिया है। लेकिन सरकार खुद की सोलर पैनल सब्सिडी की योजना और पिछली सरकार की हर महीने 100 यूनिट फ्री बिजली योजना के बीच फंस गई है। सरकार पर दोहरा आर्थिक भार
सब्सिडी देने के बावजूद सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली का लाभ न तो सरकार को मिल रहा है और न ही उपभोक्ता को। फिलहाल हालात यह हैं कि सरकार पर दोहरा आर्थिक भार आ गया है। मतलब, जिन लोगों ने सोलर पैनल के लिए सब्सिडी उठा ली है, उन्हें भी 100 यूनिट फ्री बिजली मिल रही है। केंद्र सरकार की प्रक्रिया पर नजर
हाल ही में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। केंद्र में 8वां वेतन आयोग लागू होगा तो राज्य के कर्मचारियों पर भी इसे लागू किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, नियमों के हिसाब से आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ड्यू (लंबित) है। राज्य की सरकारों को भी जल्द प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। राज्य सीधे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बजाय अपना स्टेट पे-कमीशन बनाते हैं, जिससे वेतन, पेंशन, भत्ते खुद की अर्थव्यवस्था के हिसाब से तय किए जा सकें। सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार की प्रक्रिया पर पूरी नजरें बनाए हुए हैं। राज्य कर्मचारियों की आस को देखते हुए सरकार आने वाले बजट में इसका जिक्र जरूर कर सकती है। प्रदेश सरकार अपनी वित्तीय स्थितियों के आंकलन और संबंधित आयोग की सिफारिशों के आधार पर अपनी प्रक्रिया शुरू करेगी। फिलहाल, राज्य सरकार ने वेतन आयोग को लेकर अब तक कोई सीधी प्रक्रिया नहीं अपनाई है। ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य 25 लाख करने की तैयारी
राज्य सरकार ने अपने पिछले बजट में 15 लाख महिलाओं को एक-एक लाख रुपए का लोन छोटे उद्योग-व्यापार के लिए देकर ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा था। सूत्रों के अनुसार, इस बजट में राज्य सरकार इस योजना के तहत लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या 25 लाख तक करना चाह रही है। राज्य सरकार केंद्रीय बजट घोषणा का इंतजार कर रही है, जिससे लखपति दीदी योजना के तहत मिले बजट प्रावधानों के आधार पर लाभ पाने वाली महिलाओं की संख्या तय की जा सके। केंद्र ने अपने पिछले बजट में देश में 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का प्रावधान किया था। इस योजना के तहत राजस्थान सरकार ने अपने पिछले बजट में 15 लाख का लक्ष्य रखा। योजना में उन महिलाओं को शामिल किया गया है, जो स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप) से जुड़कर अपना छोटा-मोटा व्यवसाय करती हैं। 17 जिलों की प्यास बुझाने वाली योजना के लिए बड़ी राशि मिलेगी
बजट में 17 जिलों की आबादी और फसलों की प्यास बुझाने वाले राम जल सेतु लिंक प्रोजेक्ट पर नजरें रहेंगी। राज्य सरकार का इस बजट में राम जल सेतु लिंक प्रोजेक्ट के 60 फीसदी काम तेजी से पूरे करने पर फोकस रहेगा। सरकार इस प्रोजेक्ट को बड़ी राशि आवंटित करने की तैयारी में जुटी है। पिछले बजट में घोषणा, पर जमीन पर कुछ नहीं
पिछले बजट में सरकार ने 9 ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की घोषणा की थी, लेकिन अब तक किसी भी एक्सप्रेस वे का जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ है। आमजन की नजरें बजट पर टिकी हैं कि इन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के लिए सरकार कितना बड़ा बजट प्रावधान रखेगी। पहले कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेस-वे का काम शुरू करने की योजना
राज्य सरकार पहले 181 किलोमीटर लंबे कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेस-वे का काम शुरू करना चाह रही है। इसके अलावा 350 किलोमीटर जयपुर-किशनगढ़-पचपदरा एक्सप्रेस-वे, 193 किलोमीटर जयपुर-भीलवाड़ा एक्सप्रेस-वे, 295 किलोमीटर बीकानेर-कोटपूतली एक्सप्रेस-वे, 270 किलोमीटर ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेस-वे, 402 किलोमीटर लंबे जालोर-झालावाड़ एक्सप्रेस-वे, 390 किलोमीटर अजमेर-बांसवाड़ा एक्सप्रेस-वे, 345 किलोमीटर जयपुर-फलोदी एक्सप्रेस-वे और 290 किलोमीटर लंबे श्रीगंगानगर-कोटपूतली एक्सप्रेस-वे के काम भी शुरू होने हैं। पेट्रोल की कीमतें पर निगाहें टिकीं
प्रदेशवासियों की नजरें बजट में पेट्रोल की कीमतें कम होने पर टिकी रहेंगी। राजस्थान देश में पेट्रोल की ज्यादा कीमतों को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान पहले नंबर पर था। भाजपा ने पेट्रोल की ज्यादा कीमतों को चुनाव में मुद्दा भी बनाया था। दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद दो फीसदी वैट घटाया था। इसके बाद राजस्थान में पेट्रोल की कीमतें 109 रुपए प्रति लीटर से कम होकर 105 रुपए प्रति लीटर हो गई। राजस्थान में अब भी पेट्रोल पर वैट करीब 29 फीसदी है। चुनावी घोषणा के तहत राज्य सरकार पेट्रोल की कीमतें कम करने के प्रयास में जुटी है। पेट्रोल की कीमत 2 से 4 रुपए के बीच घटा सकती है सरकार
सूत्रों के अनुसार, पेट्रोल की कीमतें कम करने के लिए राज्य सरकार वैट और घटाने का फैसला बजट में कर सकती है। हालांकि सीएम के स्तर पर फैसला होना है, जो पेंडिंग चल रहा है। राज्य सरकार प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 2 से 4 रुपए के बीच और घटा सकती है। गौरतलब है कि भाजपा का लक्ष्य है कि उसके द्वारा शासित किसी भी राज्य में पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 100 रुपए से कम ही हो। अर्थशास्त्री प्रो. एसएस सोमरा के अनुसार, रिफाइनरी से प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा और टैक्स रेवेन्यू भी 17 फीसदी तक बढ़ सकता है। रिफाइनरी से 15 हजार करोड़ रुपए के राजस्व का अनुमान है। ऐसे में बजट साइज करीब 20 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। राजस्थान का पिछला बजट (2025-26) साइज 3.79 लाख करोड़ था। 2024-25 का बजट साइज 3.34 लाख करोड़ रुपए था। प्रदेश के हर व्यक्ति पर एक लाख रुपए का कर्ज
एक्सपट्‌र्स के अनुसार, 2024-25 और 2025-26 के बजट और आर्थिक समीक्षा के आधार पर कहा जा सकता है कि सरकार पर आर्थिक दबाव है। राजस्व कम है, खर्च बढ़ा है, घाटा निरंतर बना हुआ है। राजस्थान पर कर्ज 7.3 लाख करोड़ हो चुका है। प्रदेश के हर व्यक्ति के सिर एक लाख रुपए कर्ज है। राजस्थान पर कर्जे का भार बढ़ता रहेगा। राजस्व घाटे और बड़ी योजनाओं पर सब्सिडी जारी रहने के कारण बाजार से उधार लेना पड़ेगा। वहीं, वेतन-पेंशन और ब्याज भुगतान पर राजस्व का 80 फीसदी खर्च हो रहा है। इस कारण विकास कार्यों के लिए कम पैसा बचता है।