आध्यात्मिक गुरु रवि शंकर के साथ देश के 1,300 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के हजारों स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन संवाद किया। इनमें IIT, IIM, NIT और AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल रहे। इसमें एम्स (AIIMS) जोधपुर और एमएनआईटी (MNIT) जयपुर ने भी हिस्सा लिया। इसके माध्यम से राजस्थान के विद्यार्थियों को इस विशेष संवाद में देशभर के अपने सहपाठियों से जुड़ने और विचार साझा करने का अवसर मिला। यह संवाद आर्ट ऑफ लिविंग के यूथ डेस्क की ओर से आयोजित 7वें नेशनल इंडक्शन प्रोग्राम के दौरान हुआ। रवि शंकर ने युवाओं से कहा- वे उन गुणों को कभी न खोएं, जो युवावस्था को जीवंत बनाते हैं। उन्होंने कहा- शरारती बने रहिए। यही युवावस्था की पहचान है। उन्होंने कहा- आप गतिशील और शरारती अवश्य रहें, लेकिन आपकी शरारत किसी दूसरे के लिए पीड़ा का कारण नहीं बननी चाहिए। पूरी दुनिया के युवाओं में चल रहा संघर्ष, बाहर निकलें इस दौरान एक विद्यार्थी ने पूछा- जीवन में ‘सिचुएशनशिप’ चुननी चाहिए या ‘सोलमेट’ की तलाश करनी चाहिए, तो रवि शंकर ने सवाल को एक नई दृष्टि दे दी। उन्होंने पूछा- अपने आपको उस दूसरे व्यक्ति के स्थान पर रखकर देखिए। यदि आप किसी को अपना जीवनसाथी चुनें और वह आपको केवल एक ‘सिचुएशनशिप’ के रूप में देखना चाहे, तो आपको कैसा लगेगा? तब आप क्या चुनेंगे?” कश्मीर की एक छात्रा ने कहा- जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी अंदर एक प्रकार की निरर्थकता का अनुभव होता है। रवि शंकर ने कहा- यह सवाल आज पूरी दुनिया के युवाओं के भीतर चल रहे संघर्ष को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने अकेलेपन से बाहर निकलने और जीवन में पुनः अर्थ और उद्देश्य खोजने की ओर संकेत किया। जीवन में थोड़ा हास्य रखिए रवि शंकर ने कहा- जीवन में थोड़ा हास्य रखिए। उन्होंने स्मरण कराया कि क्रोध वह दंड है, जो स्वयं को दिया जाता है। जब क्रोध उठे, तो कुछ गहरी सांसें लें, परिस्थिति से थोड़ा पीछे हटें, स्वयं को देखें और संभव हो तो उसी परिस्थिति को हास्य में बदल दें। सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में उन्होंने युवाओं को विवेकपूर्ण दृष्टि अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा- सोशल मीडिया पर जो कुछ भी आता है, उसे सच मत मान लीजिए। बहुत-सी चीज़ें झूठी होती हैं और आज उनमें से बहुत कुछ AI द्वारा निर्मित भी हैं।
