मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र की रेल सुविधाओं में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्षेत्र की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का पूरा खाका पेश किया है। इसमें चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों के लिए नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और गेज कन्वर्जन के बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। केंद्र सरकार ने नीमच-कोटा और मंदसौर-बांसवाड़ा जैसी प्रमुख लाइनों के लिए सर्वे को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही नीमच-बड़ीसादड़ी और मावली-देवगढ़ प्रोजेक्ट पर काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिससे आने वाले समय में राजस्थान के इन जिलों में औद्योगिक विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन शहरों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई बड़े सर्वे को मंजूरी दी गई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नीमच-सिंगोली-बेंगू-रावतभाटा-कोटा के बीच 201 किमी की नई लाइन है। इसके अलावा, मंदसौर-प्रतापगढ़-घाटोल-बांसवाड़ा (120 किमी) और नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद (380 किमी) जैसी बड़ी लाइनों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।चित्तौड़गढ़-मावली-देबारी के बीच 99 किमी के दोहरीकरण का सर्वे भी अंतिम चरण में है। ये प्रोजेक्ट्स भविष्य में राजस्थान को मध्य प्रदेश और गुजरात के प्रमुख शहरों से सीधे जोड़ देंगे। पुल और स्टेशनों का निर्माण अंतिम चरण में
सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक, नीमच-बड़ीसादड़ी नई लाइन के लिए 495 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं और यहां भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। इस रूट पर 7 में से 4 बड़े पुल और 30 में से 9 आरयूबी बन चुके हैं। वहीं, मावली-देवगढ़ अमान परिवर्तन के लिए 969 करोड़ की लागत से काम चल रहा है, जहां 64 में से 38 आरयूबी और 7 में से 4 स्टेशन भवनों का काम पूरा हो चुका है। अजमेर-चन्देरिया दोहरीकरण प्रोजेक्ट के लिए भी 1635 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें 114 हेक्टेयर में से 75 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और पुलों का काम शुरू हो गया है। ‘विशेष रेल परियोजना’ से उदयपुर को मिलेगी नई रफ्तार
उदयपुर के विकास के लिए केंद्र ने उमरा-उदयपुर-देबारी दोहरीकरण परियोजना को ‘विशेष रेल परियोजना’ के रूप में घोषित किया है। दिसंबर 2025 में 492 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए अलग से सक्षम प्राधिकारी भी नियुक्त किया गया है। रेल मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन सालों और चालू वित्त वर्ष के दौरान राजस्थान में कुल 5,666 किमी लंबाई के 59 सर्वेक्षणों को मंजूरी दी गई है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरे होने से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई और पर्यटन क्षेत्र में भी बड़ी तेजी आएगी।
