जोधपुर के खेजड़ली गांव में महिलाएं सोने की ज्वेलरी से लदी नजर आईं। खेजड़ी के पेड़ बचाने के लिए 296 साल पहले 363 लोगों के बलिदान को याद करने सोमवार को बिश्नोई समाज के लोगों ने मेला आयोजित किया। मेले में आने वाली महिलाओं में गृहिणी से लेकर बिजनेस वुमेन भी शामिल रहीं। कई महिलाएं एक-एक करोड़ की ज्वेलरी पहुंचकर मेले में शहीदों को नमन करके पर्यावरण बचाने का संदेश देने पहुंचीं। खेजड़ली गांव में पर्यावरण के प्रति प्रेम दर्शाने के लिए हर साल मेला भरता है। राजस्थान के बाहर से भी आए लोग मेले मे राजस्थान के कई जिलों के लोग शामिल हुए। साथ ही आस-पास के राज्यों से भी लोग खेजड़ली पहुंचे। जोधपुर, फलोदी, नागौर, बीकानेर, सांचौर, जालोर, पाली सहित विभिन्न जिलों में रहने वाले लोग मेले में शामिल हुए। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश से भी लोग आए शहीदों को नमन किया। लोगों ने हवन कुंड में नारियल की आहुतियां देकर शहीदों को नमन किया। अब देखें मेले के फोटोज… 296 साल पहले हुआ पर्यावरण आंदोलन बिश्नोई समाज के समाजसेवी रामनिवास बुधनगर ने बताया- जोधपुर के महाराजा अभयसिंह के शासनकाल में खेजड़ली गांव से खेजड़ी पेड़ों की कटाई का आदेश दिया गया था। अमृता देवी ने ‘सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तों जांण…’ का नारा देकर पेड़ से चिपककर विरोध किया और शहीद हो गई थीं। तब 363 बिश्नोई महिला-पुरुषों ने बलिदान दिया था। राजस्थान सरकार ने ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां शहीदों की नामावली के शिलालेख लिखवाए हैं। खेजड़ली मेला की ये है मान्यता
