जयपुर मेटल फैक्ट्री के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा भ्रष्टाचार किया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने यह आरोप लगाते हुए रविवार को अपने निवास से मेटल फैक्ट्री तक सरकार के खिलाफ पैदल मार्च निकाला। उन्होंने दावा किया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद मात्र तीन दिन में चीफ सेक्रेटरी और उद्योग सचिव के जरिए फैक्ट्री का कब्जा प्राइवेट कंपनी अल्केमिस्ट को सौंप दिया गया। जबकि एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए सरकार को 45 दिन का समय था, जिनमें से अब केवल 12 दिन बचे हैं। ऐसे में कब्जा तुरंत देना गंभीर सवाल खड़े करता है। खाचरियावास ने दावा किया कि फैक्ट्री के नीचे 60,000 गज जमीन है, जिसकी बाजार कीमत करीब 2000 करोड़ रुपए बैठती है। अंदर मौजूद मशीनरी का मूल्य 300 करोड़ से अधिक है। इसके बावजूद कंपनी को केवल 49 करोड़ मूलधन और ब्याज सहित लगभग 150 करोड़ रुपए के भुगतान पर कब्जा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार फैक्ट्री की नीलामी कराती है, तो प्राइवेट कंपनी का पूरा बकाया चुकाने के बाद भी मजदूरों को 15–25 लाख रुपए दिए जा सकते थे। सरकार के पास 1000 करोड़ से अधिक राशि बचती। खाचरियावास ने कहा कि फैक्ट्री बंद होने के बाद अब तक 50 से अधिक मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं। कुल 1558 मजदूरों और उनके परिवारों के सामने रोज़गार और आजीविका का संकट खड़ा है। रिटायर्ड कर्मचारियों की हालत भी खराब है। इसलिए अब जब तक सभी मजदूरों को 15–15 लाख रुपए नहीं दिए जाते है। सरकार फैक्ट्री का कब्जा वापस लेकर पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक नहीं करती है। तब तक कांग्रेस पार्टी का सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। मार्च में विधायक अमीन कागजी, कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज, गंगा देवी, सुमित शर्मा, राजकुमार शर्मा, रोहिताश सिंह, योगिता शर्मा समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।मार्ग में नागरिकों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं से कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। लोग हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर मेटल फैक्ट्री के 1558 मजदूरों को 15–15 लाख देने की मांग की गई थी।