राजस्थान में पंचायत चुनाव की घोषणा मार्च के पहले सप्ताह में हो सकती है। कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश भर में आचार संहिता भी लग जाएगी। आयोग पंचायत चुनाव 3 चरणों में कराने पर विचार कर रहा है। वहीं नगर निकाय चुनाव अप्रैल में कराने की तैयारियां चल रही हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में यह संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा- ओबीसी सीटों के निर्धारण के लिए गठित ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग रिपोर्ट नहीं दे पाता है, तब भी चुनाव तय समय पर ही होंगे। दो से अधिक संतान वाले प्रत्याशी चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं? शैक्षणिक योग्यता कितनी रहेगी? ऐसे ही सवालों के जवाब पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी में… सवाल : राज्य में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, ओवरऑल आयोग की क्या तैयारी है? जवाब : देखिए, ऐसा है कि हम लोग मार्च के महीने में प्लान कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव संपन्न हो जाएं और अप्रैल के महीने में नगर पालिका के चुनाव हो जाएं। सभी नगरीय निकायों के एक साथ चुनाव के हिसाब से हमारी तैयारियां चल रही हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हमने जो समय अवधि निर्धारित की है, उसके अंतर्गत चुनाव करा देंगे।
सवाल : दो से अधिक संतान वाले चुनाव लड़ पाएंगे? पंच-सरपंच के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या रहेगी? जवाब : ये सरकार का काम है। सरकार को देखना है कि वे क्या करते हैं। हमें तो जैसा भी वे प्लेटफार्म तैयार करके देंगे, जो भी योग्यता निर्धारित करना, कानून में संशोधन करना ये सब तो राजस्थान विधानसभा का कार्य है और उस पर इनिशिएटिव लेना राज्य सरकार का कार्य है तो उसमें हमारा टिप्पणी करना उचित नहीं है। चुनाव घोषणा से पहले राज्य सरकार जो भी प्लेटफाॅर्म तैयार करके देगी, जो भी रेगुलेटरी प्रोविजनस रहेंगे, उसके आधार पर चुनाव कराए जाएंगे। सवाल : ओबीसी आयोग ने अभी रिपोर्ट नहीं दी है, ऐसे में समय पर कैसे चुनाव करा पाएंगे? जवाब : ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी। बहुत जल्दी। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के मुश्किल से 7 दिन के अंदर हम लोग सीटें तय देंगे कि कौन सी सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होगी। इसमें दिक्कत की कोई बात नहीं है। सवाल : क्या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव करा सकते हैं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया था? जवाब : अब ये काल्पनिक सवाल है। अभी तो हम यही उम्मीद कर रहे हैं कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी। उसके बाद ज्यादा से ज्यादा 7 दिन लगेंगे सीटों को ओबीसी के हिसाब से आरक्षित करने में। अगर ये नहीं होता है तो फिर जो संवैधानिक और वैधानिक प्रावधान होंगे सर्वोच्च न्यायालय का, उसके अंतर्गत जो भी विधिक कार्यवाही होगी, हम करेंगे। सवाल : प्रदेश में नई ग्राम पंचायत बनी हैं, नए वार्डों के परिसीमन से संबंधित सूचनाएं नहीं मिली हैं, इससे कोई परेशानी तो नहीं होगी चुनाव कराने में? जवाब : नहीं, नहीं हमने वार्डवाइज जो मतदाता सूची है उसका अंतिम प्रकाशन कर दिया है। 29 जनवरी को ही किया है। उस पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाएंगे। सारा काम शेड्यूल पर चल रहा है।
सवाल : सभी पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे?
जवाब : जी हां, सभी पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे। इसके अलावा जो जिला परिषद और पंचायत समितियां हैं, जिनका कार्यकाल पूरा हो गया है। प्रशासक लगे हुए हैं तो उनके चुनाव भी एक उनके साथ ही संपन्न होंगे। सवाल : जिन पंचायतों और जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है, उनके चुनाव क्या बाद में होंगे? जवाब : अब उसके बारे में तो राज्य सरकार ही बता सकती है। हम लोग तो उन्हीं का चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है और प्रशासक लगे हुए हैं। जिनका कार्यकाल समाप्त नहीं हुआ है। उनके बारे में राज्य सरकार ही निर्णय लेगी कि कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराएं या फिर क्या परिस्थिति बनती है, यह सब सरकार के हाथ में है। सवाल : चुनाव आचार संहिता कब लग सकती है?
जवाब : चुनाव आचार संहिता चुनाव की घोषणा करने के बाद लागू हो जाएगी। मार्च के प्रथम सप्ताह में हम चुनाव की अधिसूचना जारी कर देंगे। सवाल : पंचायत चुनाव में कितने चरणों में मतदान होगा?
जवाब : मेरे हिसाब से लगभग 3 चरण में मतदान होगा। मार्च के महीने में बहुत सारे अवकाश भी हैं, उसका भी हम लोग ध्यान रख रहे हैं। उम्मीद यह है कि 31 मार्च से पहले सारी प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। सवाल : पंचायत चुनाव में कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा होता है, संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्र चिन्हित किए हैं? जवाब : ये काम जिला निर्वाचन अधिकारी का है। हमने उनको गाइडलाइंस भेज रखी है। निर्देशों के मुताबिक कैसे किन मतदान केंद्रों को संवेदनशील और अति संवेदनशील करना है, वहां किस तरह से पुलिस फोर्स लगानी है। मजिस्ट्रेट लगाने हैं, ये सब जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग समय पर क्यों नहीं दे पाया रिपोर्ट? पंचायत और निकाय के चुनाव में ओबीसी सीटों के लिए आरक्षण निर्धारण के लिए ओबीसी राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग का गठन 9 मई 2025 को हुआ था। तीन माह के कार्यकाल की समय सीमा निर्धारित की गई थी। 31 दिसंबर तक राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। सूत्र बताते हैं कि ओबीसी सीटों के निर्धारण का काम अभी बाकी है। सरकार ने एक बार फिर आयोग का कार्यकाल 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया था। इससे पूर्व में 21 अगस्त को आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था। लेकिन कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर निर्वाचन आयोग को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने ही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- पंचायत निकाय चुनाव 15 अप्रैल से पहले कराएं 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वह पंचायत-निकाय चुनाव निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से कराए और पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी करे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमला बागची की पीठ ने यह टिप्पणी रेवेन्यू गांव सिंहानिया और अन्य ग्रामीणों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज करते हुए की। ग्रामीणों द्वारा राज्य सरकार द्वारा की गई पंचायत परिसीमन एवं पुनर्गठन प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। ————————— पंचायत चुनाव से संबंधित ये खबरें भी पढ़िए… राजस्थान में बैलेट से होंगे पंच-सरपंच चुनाव:केवल जिला परिषद, पंचायत समिति मेंबर के चुनाव ईवीएम से होंगे; मध्यप्रदेश से आएंगी मशीनें राजस्थान में इस बार पंच और सरपंचों के चुनाव बैलेट ( मतपत्र) से होंगे। केवल जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ही EVM से करवाए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर… राजस्थान- हजारों नेताओं के चुनाव लड़ने पर बैन का खतरा:पंचायत इलेक्शन नहीं लड़ सकेंगे, 3 साल तक के लिए लगेगी रोक, जानें- क्या है कारण पिछले पंचायत चुनाव में खर्चे का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों की सूची मंगाने के लिए जल्द ही जिला कलेक्टरों के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। पढ़ें पूरी खबर…
