पंजाब के मानसा जिले के तीन युवाओं ने मेहनत और नवाचार से अपनी किस्मत बदल दी। साल 2022 में बेरोजगारी से जूझ रहे इन दोस्तों ने पहले सूअर पालन की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने झींगापालन का रास्ता चुना और आज वे हर साल औसतन 5-5 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। तीन दोस्तों की साझेदारी से शुरू हुआ सफर
यह कहानी बाजेवाला गांव के हरप्रीत सिंह, मीरपुर कलां के हरप्रीत सिंह और हरपाल सिंह की है। तीनों करीब 27 साल के हैं और सरदूलगढ़ के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान दोस्त बने। बाजेवाला के हरप्रीत ने एलएलबी की पढ़ाई की है, जबकि मीरपुर कलां के हरप्रीत ने राजनीति शास्त्र में एमए और हरपाल ने ग्रेजुएशन की है। लुधियाना से ली ट्रेनिंग, 26 लाख का लगाया निवेश
सूअर पालन में असफल होने के बाद तीनों ने तलवंडी के पास ज्ञाना गांव में झींगा पालन का प्लांट देखा और इस व्यवसाय की जानकारी जुटाई। इसके बाद बाजेवाला के हरप्रीत सिंह ने 2022 में लुधियाना स्थित गडवासू से ऑनलाइन ट्रेनिंग ली। तीनों ने मिलकर ढाई एकड़ जमीन पर झींगापालन प्लांट शुरू किया, जिस पर करीब 26 लाख रुपए का खर्च आया। अब यह प्लांट 6.5 एकड़ में फैल चुका है, जिसमें छह तालाब हैं। मई से सितंबर तक चलता है सीजन
हरप्रीत के अनुसार, झींगापालन का सीजन मई से सितंबर तक रहता है। अक्टूबर से अप्रैल तक प्लांट बंद रहता है और इस दौरान सफाई व रखरखाव का काम किया जाता है। झींगा विकसित होने में 120 से 125 दिन लगते हैं। इसके लिए 24 घंटे बिजली की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े जनरेटर की व्यवस्था की गई है। देशभर में होती है झींगे की सप्लाई
तीनों दोस्त चेन्नई और आंध्रप्रदेश से सालाना 7-8 लाख रुपए का बीज खरीदते हैं। झींगा तैयार होने पर इसे आंध्रप्रदेश, कोलकाता, चंडीगढ़ और दिल्ली में ऑर्डर पर बेचा जाता है। एक एकड़ में करीब 2.5 टन झींगा उत्पादन होता है, जिसका बाजार भाव 350 से 400 रुपए प्रति किलोग्राम है। स्थानीय युवाओं को भी दे रहे रोजगार
तीनों दोस्त साल में दो लोगों को 4-5 महीने के लिए रोजगार भी देते हैं। उनका कहना है कि युवाओं को विदेश जाने की बजाय अपने गांव में रहकर मेहनत करनी चाहिए। खेती और झींगापालन के संयोजन से वे न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं।
