मेवाड़ में भाजपा के कद्दावर नेता रहे वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया अपमानजनक भाषा के चलते एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार भी मामला प्रात: स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सेे जुड़ा है।
22 दिसंबर के एक वीडियो (गोगुंदा की धूली घाटी में शिलान्यास कार्यक्रम) में कटारिया बोले- महाराणा प्रताप का नाम आप कांग्रेस के राज में सुनते थे? इस महाराणा प्रताप को पहली बार जिंदा करने का काम जनता पार्टी ने किया। पहली बार विधायक भूरा भाई बनकर आए थे और पहली विधानसभा में सरकार बनाई थी। तब हमने विकास का पैसा गोगुंदा में भेजा था या नहीं? अब हल्दीघाटी भी जानी जाती है, पोखरगढ़ भी जाना जाता है और चावंड भी जाना जाता है। मायरे की गुफा थी कि नहीं? तुम्हें इतने साल दिखती थी? हमने सड़क बनाई, रास्ते बनाए। उदय सिंहजी की छतरी यहां बनाई। इस बात को कौन याद रखता है? राज्यपाल कटारिया के महाराणा प्रताप को पहली बार जिंदा करने बयान पर सियासी बवाल शुरू हो गया है। क्षत्रिय करणी सेना संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने सोशल मीडिया पर राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को धमकी दी है। इधर, धमकी के मामले एसपी योगेश गोयल के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। भास्कर में पढ़िए- ऐसे ही विवादित बयानों के बीच कटारिया को राज्यपाल बनाया, कब कौन-सा विवादित बयान दिया, कितनी बार माफी मांगी… 01. महाराणा प्रताप के लिए बोले- उसे क्या पागल कुत्ते ने काटा था, फिर माफी मांगी
साल 2020 में कटारिया नेता प्रतिपक्ष थे। तब चुनाव प्रचार के दौरान राजसमंद में जनसभा को संबोधित करते हुए महाराणा प्रताप पर विवादित बयान दिया था। कटारिया ने कहा था कि “हमारे पूर्वज 1000 साल तक लड़े हैं। यह महाराणा प्रताप अभी गया ना। उसे क्या पागल कुत्ते ने काटा था। जो अपनी राजधानी और अपना घर छोड़कर डूंगर-डूंगर रोता फिरा। किसके लिए गया था। कुछ समझ में आता है या नहीं? क्या तुम उस पार्टी के साथ जाओगे। उनके इस बयान के बाद प्रदेशभर में जबर्दस्त विरोध हुआ। खुद बीजेपी सवालों के घेरे में आ गई। उस समय भी कटारिया को जान से मारने की धमकियां मिली थीं। फिर कटारिया ने इसे अपनी भूल बताते हुए 15 दिन में तीन बार माफी मांगी। इसके बाद जैसे-तैसे मामला शांत हो सका। 02. वाल्मीकि-वारी समाज पर असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग, विरोध के बाद माफी मांगी
साल 2023 में राज्यपाल कटारिया ने गोवर्धन सागरपाल पर मां पन्नाधाय की मूर्ति के अनावरण समारोह में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में वाल्मीकि समाज के लिए असंवैधानिक शब्दों का उपयोग किया। इस पर विरोध हुआ तो माफी मांग कर मामला रफा-दफा कर दिया। इसके साथ ही कटारिया ने पत्र लिखकर कहा कि कीरत काका जो उदय सिंह को टोकरे में रखकर झूठी पत्तल डालकर उन्हें सुरक्षित महल से बाहर ले जाने का कार्य करते है, वो मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास के रूप में जाना जाता है। मैंने भी कीरत काका का वर्णन करते समय जो शब्द उपयोग किए। वो मेवाड़ में गाई जाने वाली कवि निरंजन मासूम की कविता पन्ना का बलिदान से ली है। जो वर्षों पहले लिखी और गाई जाती है। वारी समाज से भी माफी मांग ली। 2020 में विरोध से बचने के लिए पार्टी ने प्रचार के बीच घर बैठाया
विधानसभा उपचुनाव के दौरान कटारिया के विवादित बयान के बाद भाजपा की परेशानी बढ़ गई थी। प्रदेश आलाकमान ने जहां कटारिया को सियासी क्वारेंटाइन कर प्रचार से दूर कर दिया था। बीजेपी के प्रत्याशियों ने भी कटारिया को अपने पोस्टर-होर्डिंग से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद से ही वे पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। कटारिया को 22 फरवरी 2023 को असम का राज्यपाल बना दिया गया। वे 29 जुलाई 2024 तक असम के राज्यपाल रहे। इसके बाद 31 जुलाई 2024 से पंजाब के राज्यपाल के रूप में सेवारत हैं। लेकिन, कटारिया का दखल मेवाड़ की सियासत में बरकरार है। वे यहां छोटे-बड़े विकास कार्यों तक के उद्घाटन-शिलान्यास में आते रहते हैं। कई बार तो एक माह में 10 दिन तक उदयपुर प्रवास पर रहकर यहां सक्रिय रहते हैं।
