भास्कर संवाददाता | पाली मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम) में फर्जी हाजिरी और फर्जी श्रमिकों की समस्या को रोकने के उद्देश्य से विभाग ने एक्टिव मजदूरों की ई-केवाईसी प्रक्रिया शुरु की। इसमें में पाली, जालोर और सिरोही ई-केवाईसी पूरी करवाने में टॉप 10 में शामिल नहीं हो रहे हैं। इसमें दिसंबर अंत तक सभी मजदूरों को भागीदारी निभाते हुए ग्राम सेवक से संपर्क करके ई-केवाईसी करवानी जरूरी है। ई-केवाईसी नहीं करवाने वाले मजदूरों को अस्थाई रूप से हटाया जा सकता है। ई-केवाईसी नहीं करवाने वाले मजदूरों के भुगतान में बांधाएं आएगी। दरअसल ई-केवाईसी का मकसद है कि वास्ताव में कितने मजदूर हैं जो कि मनरेगा में एक्टिव है। बता दें कि इसको शुरू में झुंझुनूं और कोटा ज़िले में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, इसे धीरे-धीरे प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया। इस प्रक्रिया का मुख्य टारगेट ये सुनिश्चित करना है कि केवल एक्टिव और वास्तविक श्रमिकों को ही योजना का लाभ मिले। ई-केवाईसी करने के मामले में पाली जिला 20वें, सिरोही 21वें और जालोर 29वें पायदान पर है। करौली सबसे अंतिम पायदान पर है। जिले में 3 लाख 14 हजार 12 मजदूर है जो कि एक्टिव है। इनमें से 2 लाख 4 हजार 135 मजदूरों की ई-केवाईसी हो पाई है। यानी 65.02 प्रतिशत पूरी हुई। सिरोही में 1 लाख 74 हजार 422 मजूदरों की एक्टिव है। जिनमें से 1 लाख 11 हजार 383 मजूदरों की पूरी हो सकी है। अगर जालोर की बात करें तो 2 लाख 70 हजार 576 एक्टिव है। इनमें से 1 लाख 48 हजार 626 मजूदरों की पूरी हो पाई। इसमें टॉप 5 में झुंझुनूं ने 90.62 फीसदी के साथ ही पहले पायदान, कोटा 82.64% के साथ दूसरे नंबर, झालावाड़ 78.73 तीसरे पायदान, जैसलमेर 78.51 चौथे और बांसावाड़ा 77.63 % पूरी ई-केवाईसी करने के साथ ही पांचवें पायदान पर बना हुआ है। जबकि करौली ने अब तक 36.17 प्रतिशत मजूदरों की केवाईसी पूरी करने के साथ ही अंतिम पायदान यानी 33 वें नंबर पर है। फिलहाल ई-केवाईसी करने के लिए वीडीओ(ग्राम विकास अधिकारी) और एलडीसी इसमें केवाईसी घर-घर जा कर कर रहे है। हालांकि मजदूरों को भी अपनी ई-केवाईसी दिसंबर तक करवानी जरूरी है। बता दे कि मनरेगा में फिलहाल चल रही। ई-केवाईसी प्रक्रिया की गति धीमी नजर आ रही है। इसकी मुख्य वजह कई बार गांवों में तकनीकी खामी और नेटवर्क का इश्यू। इसके अलावा मनरेगा में मॉनिटिरिंग की कमी के चलते भी अभी ई-केवाईसी की प्रक्रिया की गति नहीं मिल पा रही है। पाली, जालोर और सिरोही अपने सक्रिय मज़दूरों की केवाईसी पूरी कराने के मामले में पिछड़े हुए हैं।