नमस्कार बाड़मेर में राज्यमंत्री केके बिश्नोई ने भजन गाकर भाजपा-कांग्रेस का फर्क समझाया। बूंदी में पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने नेताजी नरेश मीणा को ‘नीलगाय’ कह दिया। ब्यावर में पाकिस्तान को बड़ा भाई कहने वाले सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल साहब अब ‘सफाई अभियान’ चलाए हुए हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. मंत्रीजी के कोयल-कौवे का अर्थ बात भूगोल से शुरू हुई और भजन पर जाकर खत्म हुई। धोरीमन्ना में बाड़मेर-बालोतरा का भूगोल बदलने के उपलक्ष्य में धन्यवाद सभा और भक्ति संगीत का कार्यक्रम रखा गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद रात में पहुंची भीड़ देख मंत्रीजी को विश्वास हो गया कि भूगोल बदलने से जनता खुश है। वे धन्य हुए और धन्यवाद करने लगे। हालांकि जिलों का भूगोल बदलने को लेकर विपक्षी दल के नेताओं ने खूब रैली-भाषण किए। धरना भी दिया। लेकिन भक्ति संगीत का कार्यक्रम नहीं रखा। यह पूर्ति यहां हो गई। इस मौके पर मंत्रीजी ने जनता को समझाया कि उनकी पार्टी और विपक्षी पार्टी में ‘क्वालिटी’ का अंतर है। कोयल भी काली होती है और कौआ भी काला होता है। लेकिन जब दोनों बोलते हैं तो अंतर स्पष्ट हो जाता है। मंत्रीजी ने यही बात गाकर समझाई- भाई म्हारा, रंग सूं तो रंग मिल जाए, गुणां री जोड़ी नाय मिले। कागा-कोयल एक ही रंग रा, बैठे एक ही डाल। कड़वो तो कागो बोले है, कोयल रस बरसाए। (मेरे भाई रंग से तो रंग मिल जाता है, लेकिन गुण नहीं मिलते। कौआ और कायल दोनों काले हैं, एक ही डाल पर बैठे हैं। लेकिन कौआ कड़वा बोलता है और कोयल रस बरसाती है।) 2. पूर्व मंत्री ने नेताजी को कहा ‘नीलगाय’ कौआ और कोयल के बाद अब बात नीलगाय की। नीलगाय को प्रदेश के कई हिस्सों में रोज या रोजड़ा भी कहा जाता है। काले-सिलेटी रंग का यह जंगली जानवर घोड़े और हिरण का मिला-जुला रूप लगता है। यह खेतों में घुसकर फसलों को चौपट कर देता है। कई जिलों में किसान रोज से काफी परेशान रहते हैं और खेतों की रखवाली के लिए रातभर जागते हैं। बात का विषय ‘राजस्थान में किसानों की समस्याएं और समाधान’ नहीं है। मुद्दा विशुद्ध राजनीतिक है। क्योंकि पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने भगत सिंह सेना नामक दल के प्रमुख नेता नरेश मीणा को ‘नीलगाय’ कह दिया। हुआ यह कि नरेश मीणा ने जब अंता में चुनाव लड़ा तो कांग्रेस ने अशोक चांदना को प्रभारी के रूप में जिम्मा सौंपा। नरेश मीणा ने खूब टक्कर दी लेकिन चांदना ने उन्हें चित्त कर दिया और कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया की जीत हुई। इसके बाद नरेश मीणा ने शपथ ली कि अगला चुनाव अशोक चांदना के विधानसभा क्षेत्र से लड़ेंगे और हार का बदला लेंगे। इन दिनों नरेश मीणा विधायक अशोक चांदना के विधानसभा क्षेत्र में खूब चक्कर लगा रहे हैं। एक भक्ति संगीत के कार्यक्रम में अशोक चांदना ने मन की बात लोगों के सामने रख दी। बोले-इलाके में कुछ लोग नीलगाय की तरह आने लगे हैं। फसल बढ़िया होती है तो नीलगायें आती ही हैं। उधर, नरेश मीणा ने भी उनके क्षेत्र में एक सभा में ऐलान किया, कहा- वो कहते था कि हिंडौली में मेरा ही सिक्का चलेगा। अरे तुम्हारा नहीं चलेगा। तुम्हारा तो हिंडौली में ही चलेगा, नरेश का पूरे राजस्थान में सिक्का चलेगा। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन जनता बयानबाजी का खूब लुत्फ उठा रही है। 3. पाकिस्तान को बड़ा भाई बताने वाले प्रिंसिपल साहब की सफाई कौआ, कोयल और नीलगाय के बाद अब इंसानों पर आते हैं। वे सरकारी कॉलेज में प्रिंसिपल हैं। उन्होंने 75 साल से चली आ रही एक ‘भूल में सुधार’ किया है। अब तक देशभक्ति की फिल्में बनाने वाले डायरेक्टरों और कथा लेखकों को लगता था कि हिंदुस्तान अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान का पिता है। कुछ उदारवादी और पड़ोसी प्रेमी लेखक भारत को पाकिस्तान का बड़ा भाई कह देते हैं। लेकिन प्रिंसिपल साहब ने ‘संदर्भ’ देते हुए कह दिया पाकिस्तान भारत का बड़ा भाई है। उन्होंने तर्क दिया-जो पहले पैदा होता है वो बड़ा होता है। पाकिस्तान हमने 12 घंटे पहले पैदा हुआ। सिर्फ पहले पैदा ही नहीं हुआ, हमसे पहले उसने घुट्‌टी पी। हमसे पहले उसके मंगल गीत गाए गए। हमसे पहले उसे नहलाया-धुलाया गया। इसलिए वह बड़ा भाई है। बात तो उन्होंने तर्कपूर्ण ढंग से रखी थी, लेकिन- एक दम से वक्त बदल गया, हालात बदल गए, जज्बात बदल गए। ये तो जुल्म है। प्रिंसिपल साहब के ‘ऐतिहासिक’ ज्ञान को लोगों ने सोशल मीडिया पर इतना शेयर किया कि उन्होंने सफाई दे डाली है। कहा है-मेरा वो मतलब नहीं था। मैंने तो व्यंग्यात्मक रूप में कहा था। 4. चलते-चलते… राजस्थान अजब-गजब प्रदेश है। यहां रेत भी निचोड़ेंगे तो किसी वाद्ययंत्र की तान निकलेगी। सोशल मीडिया पर एक लोक कलाकार का वीडियो काफी पसंद किया जा रहा है। कलाकार रावणहत्था बजा रहा है। उसने रावणहत्थे का नाम मनराम रखा है। वह मनराम से बातचीत करते हुए तान छेड़ता है। कलाकार के सवाल और रावण हत्थे का जवाब। मनराम। ससुराल गया था? तेरी पत्नी को लाया तो महिलाओं ने क्या गाया? कोयल गाई? कैसे गाई? हर सवाल के बाद उत्तर में एक तान सुनाई देती है और कान यकीन करते हैं कि यही सही जवाब है। कलाकार के इर्द-गिर्द श्रोताओं की आवाजें आ रही हैं। वे रोचक बातचीत को ध्यान से सुन रहे हैं और आनंदित हो रहे हैं। रावण हत्था एक प्रकार की वीणा है। इसे लेकर कहा जाता है कि रावण ने एक तार से इसे बनाया था और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यही वाद्य बजाया करता था। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के जिलों जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और पाली में भोपा जाति के लोग लोकदेवता पाबूजी की फड़ गाते वक्त यह वाद्य बजाते हैं। सरस्वती नदी भले लुप्त हो गई हो, लेकिन राजस्थान में सरस्वती यहां के संगीत में अनवरत बह रही है। (इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर), मुकेश नागर, (बूंदी), सुनील जैन (अजमेर)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…