पाली। मेरी दिव्या कहां है… उसे भूख लगी होगी…उसे दूध पिलाना है… दिव्या को ले आओ… ये शब्द कहते-कहते रतलाम बोरखेड़ा की रहने वाली माया बांगड़ अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के बाहर कई बार जैसे शून्य में चली गई। उससे पूछने पर वह कहती दिव्या तो मेरी गोद में है। वह सो रही है। कौन ले गया। उसे यकीन ही नहीं हो रहा है कि एक साल की दिव्या उसे छोड़कर जा चुकी है।