मनुष्य के शरीर में कई बीमारियां ऐसी होती है, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से पहुंचती हैं। आंखों की बीमारी ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ जैसी बीमारियों में रेटिना की कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब हो जाती हैं और व्यक्ति की दृष्टि कम होती चली जाती है। लेकिन अब जीन थेरेपी से इनका कारगर इलाज संभव है। जेईसीसी में आयोजित चार दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘एआईओसी 2026’ में आए आंखों से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इलाज की नई तकनीकों के बारे में बताया। प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन सिंह तितियाल ने बताया- भारत में ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ (आरपी) की दर वैश्विक औसत से काफी अधिक है। दुनियाभर में लगभग 4,000 में से 1 व्यक्ति आरपी से प्रभावित होता है। जबकि भारत में यह दर लगभग 750 में से 1 है। यानी वैश्विक औसत की तुलना में भारत में इसके मामले 5 से 6 गुना अधिक हैं। आरपीई 65 जीन के कारण होने वाली का बीमारी में जीन थेरेपी कारगर है। जीन थेरेपी में वैज्ञानिक खराब जीन की जगह सही जीन को आंख की कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं। इसके लिए विशेष प्रकार के वायरस का उपयोग किया जाता है, जो केवल जीन को कोशिका तक पहुंचाने का काम करता है। सही जीन मिलने पर कुछ कोशिकाएं फिर से काम करना शुरू कर देती हैं और मरीजों की दृष्टि में सुधार हो सकता है। फेम्टोसेकंड लेजर से मोतियाबिंद की अधिक सटीक सर्जरी
डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया- मोतियाबिंद के ऑपरेशन में अब फेम्टोसेकंड लेजर तकनीक का उपयोग होने लगा है। इसमें सर्जरी के कुछ महत्वपूर्ण चरण बहुत तेज और सटीक लेजर किरणों की मदद से किए जाते हैं जैसे आंख में बेहद छोटा और सटीक चीरा लगाना, लेंस के ऊपर की पतली झिल्ली को सावधानी से खोलना और मोतियाबिंद को पहले ही छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देना। लेजर की सटीकता के कारण आसपास की कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है, सर्जरी अधिक नियंत्रित तरीके से की जा सकती है और कई मामलों में मरीज की रिकवरी भी तेज हो जाती है। 80 से अधिक साइंटिफिक सेशन आयोजित चार दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया- कि ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से यह कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इस कॉन्फ्रेंस में अब तक 80 से अधिक साइंटिफिक सेशन आयोजित हुए, जिसमें डॉक्टर्स ने अपने रिसर्च और जटिल केसों के बारे में बताया। ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि दूसरे कई विषयों पर पैनल डिस्कशन हुए।
