पिछले 30 सालों में ठगों ने सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ते ही ठगी के तरीकों को भी हाईटेक किया है। जहां पहले सोने की ईंट बता कर पीतल बेच देते थे। वहीं अब ब्रांडेड जीन्स-टी शर्ट के विज्ञापनों से लोगों को ठग रहे हैं। अब पढ़े-लिखे लोग साइबर ठगी में शामिल हो रहे हैं। पहले ग्रामीणों से ठगी की जाती थी, अब ट्रेंड बदलकर युवाओं को ठगा जा रहा है। एक क्लिक और आपका अकाउंट साफ… भरतपुर साइबर सेल प्रभारी अनिल जसोरिया बताते हैं- भरतपुर, डीग समेत मेवात का इलाका साइबर ठगों का गढ़ रहा है। अब ई सिगरेट, ब्रांडेड जीन्स के नाम पर ठगी का जाल फैला रहे हैं। एडिशनल एसपी गिर्राज मीणा बताते हैं- पढ़े-लिखे युवा साइबर ठग बन रहे हैं। होटल में रूम बुक करने से लेकर, नौकरी का लालच देकर ठगी की जा रही है। हालांकि, पुलिस ने ऑपरेशन एंटी वायरस चलाया, इसके चलते 2025 में 85% क्राइम में कमी आई है। दैनिक भास्कर में पढ़िए 30 साल में कैसे बदला ठगी का पैटर्न… सोने की ईंट, जमीन में गड़ा धन
भरतपुर साइबर सेल प्रभारी अनिल जसोरिया बताते हैं- मेवात के इलाकों में ठगी का पैटर्न 30 सालों में बदला है। यहां ठग पहले भी एक्टिव थे। 1995 में सोने की ईंट, जमीन में गड़ा खजाना, भूत-प्रेत के नाम से ठगी को अंजाम दिया जाता था। ये पैटर्न सबसे लंबा चला, करीब 15 सालों तक ठग इसी के जरिए ग्रामीणों, ट्रक ड्राइवर और शहरी लोगों को ठगते रहे। 30 साल पहले ठगी के तरीके बेहद कम थे। मोबाइल भी सीमित थे। ठग किसी भी अनजान नंबर पर फोन करते। उन्हें अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसाते थे। ठग फोन करने वाले व्यक्तियों को बताते थे कि वह जेसीबी से खुदाई का काम करते हैं। खुदाई में सोने की ईंट मिली है
अनिल जसोरिया बताते हैं- जब वह खुदाई कर रहे थे तो, उन्हें खुदाई में सोने की ईंट या कोई जेवर मिला। वह उसे बेचना चाहते हैं लेकिन, उन्हें डर है की अगर वह सोने के जेवर या ईंट को बाजार में बेचने के लिए जाएंगे तो, वह फंस सकते हैं। इसलिए ठग अनजान व्यक्ति को सोने के जेवर या ईंट सस्ते दामों में बेचने के लिए कहते। व्यक्ति लालच में आकर ठगों की बातों में आ जाता। ठग व्यक्ति को मेवात इलाके में बुलाते। जिसके बाद व्यक्ति को पीतल की ईंट दिखाते। जिस पर सोने का पानी चढ़ा होता था। बाजार में जाते तो निकलता नकली
जसोरिया कहते हैं- जब व्यक्ति उसे सोने चेक करवाने के लिए कहता था तो, ठग पीतल की ईंट के ऊपर थोड़ा सा सोना व्यक्ति को दे देते। जिसके बाद व्यक्ति उसे बाजार में चेक करवाने जाता तो, वह सोना ही निकलता। उसके बाद ठग पीतल की ईंट को सोने का बताकर अनजान व्यक्ति को आधे दामों में बेच देते। जिसके बाद वह फरार हो जाते। व्यक्ति जब घर जाकर पीतल की ईंट की जांच करवाता तो, पता लगता की वह सोने की नहीं पीतल की ईंट है। सेक्सटॉर्शन से हुई थी ठगी की शुरुआत
साल 2014-15 से सोशल मीडिया का दौर आया। सोशल मीडिया के साथ ठग भी अपडेट हुए। सोशल मीडिया से सबसे पहले सेक्सटॉर्शन के जरिए लोगों को फंसाना शुरू किया। सेक्सटॉर्शन में फंसाने के लिए साइबर ठग सबसे पहले मोबाइल से किसी भी अनजान व्यक्ति को वीडियो कॉल करते थे। उसके बाद व्यक्ति को दूसरे मोबाइल से अश्लील वीडियो दिखाते। साइबर ठग ऐसे अश्लील वीडियो को यूज करते जिससे व्यक्तियों को लगता था की सामने कोई लड़की ही बैठी है। जैसे ही सामने वाला व्यक्ति उनके जाल में फंसता वे तीसरे फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल करते। जब व्यक्ति पैसे देने में आनाकानी करता तो, उसे पुलिस, CID, IB का अधिकारी बनकर फोन करते। जिसके बाद उन्हें धमकियां देते। फर्जी फोन से व्यक्ति डर जाता और साइबर ठगों को पैसे देने के लिए राजी हो जाता। ठगों ने बदला पैटर्न
इसके बाद साइबर ठगों ने लोगों को लुभाने का तरीका अपनाया। साइबर ठगों ने फैशन के साथ अपना तरीका भी बदला। युवाओं का आकर्षण महंगे कपड़े, ब्रांडेड कपड़े, ब्रांडेड जूते, महंगे सूट, महंगे ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक आइटम की तरफ रुझान बढ़ा। जिसके बाद साइबर ठगों ने भी अपना तरीका बदल लिया। अब साइबर ठग चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम का उपयोग करने लगे। नौकरी के बहाने अकाउंट साफ
एडिशनल एसपी गिर्राज मीणा से बात की तो उन्होंने बताया कि पहले मेवात इलाके के ठग नकली सोने की ईंट और पैसे दोगुने करने के नाम पर ठगी करते थे। अब पिछले 5 साल से ठगी के तरीके में अंतर आया है। अब पेंसिल की कंपनी में नौकरी देकर उसके नाम पर ठगी करते हैं। होटल में कमरा बुक करने के नाम पर ठगी करते हैं। साइबर ठगों द्वारा रोजाना नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। साइबर ठगों को रोकने के लिए ऑपरेशन एंटी वायरस चलाया गया। अगर साइबर अपराध में कमी की बात करें तो, पिछले साल की मुकाबले इस साल साइबर अपराध में 85 प्रतिशत तक कमी आई है।
