कस्बे की शुभाशीष गौशाला में चल रही भागवत कथा में तीसरे सोपान में कथा वाचक पंडित रवि गौतम ने कहा कि भागवत गीता में सभी समस्याओं का समाधान है, इसके वचन अमृत समान हैं। इन्हे संभाल कर रखो। तन मन धन को गोमाता की सेवा में और हरि भजन में लगा दो, तुम भव सागर से पार लग जाओगे। उन्होंने माला पहनने की नहीं माला फेरने की सलाह दी। कितना ही धनवान हो, लेकिन उसके पास राम नाम नहीं भगवान के भजन नहीं करता है। उसके घर पर भगवान नहीं है उसके पास कुछ नहीं है, वहीं निर्धन है। उन्होंने वर्तमान में बिगड़ रही सामाजिक व्यवस्था पर कहा कि अभी परिवारों में प्रेम नहीं है। उन्होंने भगवान राम, उनके भाई भरत , लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा कि इनसे सिख लो जिन्होंने त्याग ही त्याग किया। आज के भाई भाई के यहां नहीं आता बोलचाल नहीं है। भरत जी ने भाई के लिए राज्य को ठोकर मार दी और रामजी ने भी अपने पिता के वचनों के लिए और भाई को राजा बनाने के लिए वनवास चले गए। आज के मानव की खुद के धन दौलत पर नजर नहीं रहती, दूसरे के धन पर होती है। हनुमानजी ने लंका में सब देखा केवल भगवान नहीं देखे तो उन्होंने लंका को ही जला डाला और कहा की जहां सब कुछ हो लेकिन भगवान नहीं है तो वहां नहीं रुकना चाहिए। कथा में मुख्य यजमान देवलाल खलोरिया, और तारज पंचायत प्रशासक बनास बाई मालव, पूर्व सरपंच ज्ञानचंद मालव ने भागवत की पूजा अर्चना और आरती की। कथा स्थल पर रात्रि में भजन कीर्तन करने पहुंचती महिलाएं।
