जैसलमेर के बस अग्निकांड में एक ही परिवार के 5 सदस्य जिंदा जल गए थे। DNA मैच होने के बाद जब गुरुवार को उनके शव पोटलियों में सौंपे गए तो परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। 70 साल के बुजुर्ग 2 दिन से भूखे-प्यासे थे। वे अपनी बेटी-दामाद और दोहिते-दोहिती के अवशेषों का इंतजार कर रहे थे। वहीं अपने भाई का शव लेने पहुंचे जैसलमेर के सुंदरलाल ने पोटली थामी तो आंसू नहीं रोक पाए। बोले- अपने मां-बाप को अब क्या दिखाएंगे। जोधपुर एम्स और महात्मा गांधी अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर शव लेने के लिए आए परिजन इसी तरह बेबस नजर आ रहे थे। बस अग्निकांड में 22 लोगों की मौत हो गई। इनमें 19 लोग जिंदा जले थे। उनके शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। करीब 24 घंटे बाद DNA सैंपल मिलाए जा सके। भास्कर ने ऐसे परिवारों से बातचीत कर उनका दर्द जाना… 70 साल के नाना 2 दिन से भूखे-प्यासे, पोटलियों में अवशेष देख फफक पड़े जोधपुर के शेरगढ़ निवासी महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार इस अग्निकांड का शिकार हो गया। महेंद्र मेघवाल, उनकी पत्नी पार्वती, बेटा शौर्य और 2 बेटी खुशबू व दीक्षा मेघवाल के शरीर बुरी तरह से जल गए थे। बस कुछ अवशेष ही बचे थे, जिनके सैंपल लेकर परिजनों के DNA से मिलान किया गया। महेंद्र मेघवाल के 70 वर्षीय ससुर पूंजाराम 2 दिन से भूखे-प्यासे मॉर्च्युरी के बाहर बैठे थे। भास्कर ने जब पूंजाराम से हादसे का जिक्र छेड़ा तो मुश्किल से कुछ शब्द ही बोल पाए। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पार्वती और दामाद महेंद्र मेघवाल अपने बच्चों के साथ दीपावली की छुट्टियां लेकर त्योहार मनाने घर लौट रहे थे। लेकिन जो बस उन्हें घर ले जाने वाली थी, वही उनकी मौत बन गई। हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया। महेंद्र मेघवाल जैसलमेर आयुध डिपो में तैनात थे। वे जैसलमेर में अपने परिवार के साथ इंदिरा कॉलोनी में रहते थे। महेंद्र मूल रूप से जोधपुर जिले के सेतरावा पंचायत के गांव लवारना के रहने वाले थे। थैलियों-पोटलियों में शव देखे तो बिलख पड़े परिजन
वहीं, जैसलमेर के लाठी फायरिंग रेंज से आए सुंदरलाल को गुरुवार सुबह 11:15 बजे जब प्लास्टिक के बैग में भाई गोपीलाल का शव मिला तो उसे देखकर वह फफक-फफककर रोने लगे। उन्हें दिलासा देने के लिए पास आए लोगों के भी आंसू निकल आए। सुंदरलाल ने बताया कि हम अपने मां-बाप को थैलियों-पोटलियों में उनके बेटे के ये अवशेष कैसे दिखाएं? हमें तो ये भी नहीं मालूम कि हम जिसके अवशेष ले जा रहे हैं, वे हमारे भाई के हैं भी कि नहीं। पटाखों का थैला पांव से अंदर धकेला, धुआं उठने लगा तो मची भगदड़ हादसे में झुलसे पीर मोहम्मद के परिजन बशीर खान से हमने बात की। बशीर खान ने कहा- पीर मोहम्मद ने मुझे बताया कि वह अपने परिवार के साथ स्लीपर बस में सबसे आखिर में बैठा हुआ था। उसके दो बच्चे इरफान और हसीना ऊपर स्लीपर कोच में मोबाइल देखने में लगे थे। उन्हें 20 किलोमीटर बाद ही उतरना था। बस जब चली तो उसके पास बैठे आदमी ने एक थैले को पांव से धक्का देकर सीट के नीचे धकेल दिया। थोड़ी देर में ही वहां से धुआं उठने लगा। धुआं उठता देख उसने कंडक्टर को बताया। लेकिन इस बीच एसी में शॉर्ट सर्किट हो गया। जिसके धमाके की आवाज से बस में भगदड़ मच गई। FSL टीम को भी बस में पटाखों के होने संबंधी कुछ एविडेंस मिले हैं। FSL की 25 लोगों की टीम ने 55 DNA सैंपल जांचे बस के भीतर जिंदा जले 19 शवों के करीब 55 सैंपल जांच के लिए जोधपुर स्थित FSL की लैब में लाए गए थे। उनमें से 18 शवों की पहचान कर ली गई है। डीएनए परीक्षण के बाद 10 शव एम्स हॉस्पिटल और 9 शव महात्मा गांधी हॉस्पिटल जोधपुर में रखे गए थे। एम्स के एक शव की पहचान नहीं हो पाई है। जांच के लिए 25 डीएनए एक्सपर्ट की टीम बनाई गई थी। जयपुर से आई FSL की स्पेशल टीम को लीड कर रहे DNA विभाग, जयपुर के उप निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने बताया- जोधपुर FSL के पास 15 अक्टूबर की सुबह 11 बजे सैंपल जमा होने शुरू हुए थे। इसके बाद रात 8 बजे, फिर रात 11 बजे, फिर देर रात 3 बजे कुल 55 पैकेट DNA जांच के लिए जमा हुए। सभी DNA जांच रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर दे दी गई। …………….. ये खबर भी पढे़ं… जैसलमेर अग्निकांड में मौत का आंकड़ा बढ़ा:जोधपुर में तैयार हो रही 66 बसों को किया जब्त; स्लीपर बस मालिक और ड्राइवर गिरफ्तार जैसलमेर बस अग्निकांड में पुलिस ने बुधवार रात बस मालिक तुराब अली और ड्राइवर शौकत को गिरफ्तार कर लिया। एसपी अभिषेक शिवहरे ने बताया- इस मामले में 2 FIR दर्ज हुई थी। वहीं, इस अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। (CLICK कर पढ़ें) जली बस की सीटों पर चिपके थे मांस के लोथड़े:प्लास्टिक-पर्दों के कारण गैस चैंबर बनी, दावा- जलने से कम, दम घुटने से मौतें ज्यादा जैसलमेर में हुए स्लीपर बस अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें अधिकांश की मौत कार्बन मोनो ऑक्साइड से दम घुटने के चलते हुई थी। बस में सबसे पहले घुसकर सबूत जुटाने वाली फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम इतनी मौतों के पीछे प्रथम दृष्टया यही कारण मान रही है…(CLICK कर पढ़ें)