चित्तौड़गढ़ में ट्रेलर की टक्कर से कार सवार बिजनेसमैन और उनकी पत्नी की मौत हो गई। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। माता-पिता को खोने के बाद 6 साल का बेटा सदमे में है। 15 साल की बेटी घर के बरामदे में खामोश बैठी है। इकलौते बेटे और बहू की मौत के बाद बुजुर्ग माता-पिता पर पोते-पोती की जिम्मेदारी आ गई। बुजुर्ग माता-पिता बेटे की तस्वीरें सीने से लगाकर रो रहे हैं। बिजनेसमैन की बेटी निष्ठा ने कहा- मम्मी-पापा मकर संक्रांति की सुबह उदयपुर गए थे। मेरे 10वीं बोर्ड के एग्जाम नजदीक थे, इसलिए मैं नहीं गई थी। घर पर परदादी हैं, उन्हें संभालने के लिए कोई चाहिए था, इसलिए दादा-दादी भी घर पर ही रुक गए। शादी समारोह में शामिल होने के बाद बुधवार (14 जनवरी) रात को ही उदयपुर से घर के लिए निकल गए थे, क्योंकि अगले दिन भाई का स्कूल था। आखिरी बार रात 11:30 बजे मम्मी का कॉल आया था। कहा था कि हम 12 या 12:30 बजे तक निकल जाएंगे। इसके बाद सब सो गए। ढाई घंटे बाद हादसा हो गया। किसी ने फोन कर बताया था। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा घटनाक्रम… सड़क पर अचानक जानवर आने से हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार- चित्तौड़गढ़ के मधुबन इलाके के रहने वाले रिंकेश नानवानी (40), पत्नी सुहानी (38), बेटा वैभव (6), चाची रजनी (58) निवासी प्रतापनगर (चित्तौड़गढ़) और फूफा हीरानंद लालवानी (60) निवासी इंदौर (MP) के साथ उदयपुर में शादी समारोह से लौट रहे थे। गुरुवार रात 2 बजे भादसोड़ा थाना क्षेत्र में सड़क पर अचानक आए जानवर को बचाने के चक्कर में कार बेकाबू हो गई। डिवाइडर से टकराने बाद कार हाईवे के दूसरी तरफ सामने से आ रहे ट्रेलर से जा टकराई। इससे कार के परखच्चे उड़ गए। कार, ट्रेलर में बुरी तरह फंसी
भादसोड़ा SHO महेंद्र सिंह ने बताया- हादसे के बाद कार सवार करीब दो घंटे तक गाड़ी में फंसे रहे। कार, ट्रेलर में बुरी तरह फंस गई थी। पुलिस ने क्रेन की मदद से कार को खींचकर बाहर निकाला। करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद कटर से कार के गेट काटकर शवों और घायलों को बाहर निकाला गया। आगे की सीट पर बैठे पति-पत्नी के सिर फट गए थे, जिससे उनकी मौत हो चुकी थी। पीछे बैठी बिजनेसमैन की चाची और फूफा गंभीर रूप से घायल थे। हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में दोनों ने दम तोड़ दिया। केवल 6 साल वैभव बचा है। हादसे में बचा मासूम सदमे में, इंजेक्शन लगाकर सुलाया
हादसे में बचा 6 साल का वैभव इतना डर गया कि न तो कुछ खा पा रहा था और न ही सो पा रहा था। वह लगातार रो रहा था। डॉक्टरों ने बताया- बच्चे को चुप करना बेहद जरूरी था, इसलिए उसकी नींद स्थिर रखने के लिए इंजेक्शन दिया गया। इंजेक्शन के बाद ही वह सो पाया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है, लेकिन मन पर पड़ा यह सदमा उसे लंबे समय तक परेशान करेगा। वैभव को रात में यही बताया गया कि उसके मम्मी-पापा हॉस्पिटल में बेहोश है। उसे अब तक नहीं बताया गया है कि वे इस दुनिया में नहीं रहे। घर में पसरा सन्नाटा रिंकेश नानवाली के घर पर मातम पसरा है। रिंकेश की मां सुनीता रोते-रोते बेसुध हो गई। बरामदे में बैठी 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी निष्ठा की आंखें भी आंसुओं से भरी है। निष्ठा ने बताया- रात करीब 2:45 बजे किसी रिश्तेदार का फोन आया कि एक्सीडेंट हो गया है, तुरंत हॉस्पिटल आ पहुंच जाओ। रिश्तेदारों ने रात में में घर जाने से रोका था रिंकेश के पिता राजकुमार नानवानी ने बताया- हॉस्पिटल पहुंचने के बाद पता चला कि हमारी दुनिया ही खत्म हो गई। रिश्तेदारों ने रात में घर जाने से रोका था, लेकिन सुबह बच्चों के स्कूल होने के कारण बहू सुहानी ने रात में ही लौटना ठीक समझा। किसी को क्या पता था कि यही सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। राजकुमार ने बताया- उनका बेटा दिनभर साथ दुकान पर बैठता था और साथ ही घर लौटते थे। ‘मेरा इकलौता बेटा था… सब उजड़ गया… मेरा परिवार खत्म हो गया।’ कैंसर पीड़ित रजनी के पति सदमे में
इस हादसे में जान गंवाने वाली रजनी के पति मनोज नानवानी भी गहरे सदमे में है। वे मुंह के कैंसर से पीड़ित है। इसी कारण वे शादी में नहीं गए थे और बेटे भावेश के साथ घर पर ही रुके थे। मनोज ने बताया-रजनी ही उनका पूरा ध्यान रखती थी। उन्हें क्या पता था कि वह अब कभी लौटकर नहीं आएगी। एक पल में उनका सहारा भी उनसे छिन गया। यह हादसा जिंदगी भर का दर्द बन गया है। — हादसे की ये खबर भी पढ़ें … ट्रेलर से भिड़ी बिजनेसमैन की कार, 4 की मौत:गाड़ी के परखच्चे उड़े, गेट काटकर शवों को निकाला; 6 साल का बेटा बाल-बाल बचा चित्तौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाईवे पर सामने से आ रहे ट्रेलर से बिजनेसमैन की कार भिड़ गई। इस हादसे में बिजनेसमैन, उसकी पत्नी सहित 4 लोगों की मौत हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)
