अलवर के केमिकल किंग कहे जाने वाले दिवंगत उद्योगपति प्रमोद कुमार शर्मा के बड़े बेटे अरुण ने अपने छोटे भाई वरुण शर्मा और उनकी पत्नी श्रुति तिवारी पर करोड़ों रुपए के गबन का आरोप लगाया है। अरावली थाने में मामला दर्ज करवाया है। पिता की फर्म के बैंक खातों से फर्जी साइन करके करीब 3 करोड़ 96 लाख 66 हजार 308 रुपए निकालने का आरोप लगाया है। अरुण का आरोप है कि आरोपियों ने फर्म को करीब 6 करोड़ रुपए से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। प्रमोद कुमार शर्मा ने साल 1970 में ‘मैसर्स सील साइंटिफिक एंड सप्लायर्स’ नाम से बिजनेस शुरू किया था। अलवर और भिवाड़ी में फैले उनके कारोबार के कारण उद्योग जगत में उन्हें “केमिकल किंग” के नाम से जाना जाता था। फर्म का मुख्य कार्यालय अलवर में है, जबकि भिवाड़ी में भी इसकी एक शाखा चलती है। अरावली विहार थाने के SHO रामेश्वर दयाल ने बताया- कोर्ट के आदेश (इस्तगासे) पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब 6 पॉइंट मे समझिए पूरा मामला … 1. पैरालिसिस अटैक के बाद बदले हालात अरुण शर्मा ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया-11 नवंबर 2023 को मेरे पिता को पैरालिसिस (लकवा) का अटैक आया था। इसके बाद उन्हें चलने-फिरने, बोलने और लिखने में काफी परेशानी होने लगी। वे अधिकांश समय घर पर ही रहने लगे। आरोप है कि इसी दौरान छोटे भाई वरुण शर्मा ने बिजनेस और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज को अपने नियंत्रण (कंट्रोल) में लेना शुरू कर दिया। 15 मई 2024 को पिता का निधन हो गया। उस समय पूरा परिवार शोक में डूबा था, लेकिन बाद में जब बैंक खातों और व्यापारिक रिकॉर्ड की जांच की गई, तो करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया। 2. बैंक खातों से 3.96 करोड़ रुपए निकाले अरुण शर्मा ने रिपोर्ट में बताया कि मार्च 2025 में जब उन्होंने बैंक खातों की जानकारी जुटाई, तो पता चला कि भिवाड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और एचडीएफसी (HDFC) बैंक के खातों से 3 करोड़ 96 लाख 66 हजार 308 रुपए कई अन्य खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। यह भारी-भरकम राशि वरुण शर्मा, उनकी पत्नी श्रुति तिवारी और उनसे जुड़े अन्य खातों में भेजी गई थी। अरुण शर्मा का कहना है कि जब उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से खातों की डिटेल (विवरण) निकाली, तो उन्हें एक ऐसा दस्तावेज मिला जिस पर उनके पिता के कथित हस्ताक्षर थे। जांच करने पर उन्हें पूरा संदेह हुआ कि यह दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किया गया है और इस पर पिता के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। 3. फर्जी लेटर बनाकर बैंक में पेश करने का आरोप अरुण शर्मा ने रिपोर्ट में बताया कि 7 दिसंबर 2023 को वरुण शर्मा ने पंजाब नेशनल बैंक की नीलम चौक, भिवाड़ी शाखा में एक प्राधिकृत पत्र (ऑथराइजेशन लेटर) जमा कराया। इस लेटर पर उनके पिता की फोटो लगाई गई और फर्जी हस्ताक्षर कर वरुण को बैंक खातों के संचालन के लिए अधिकृत दर्शाया गया। उस समय उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और अलवर स्थित घर पर रह रहे थे। उन्होंने कभी भी ऐसा कोई प्राधिकृत पत्र जारी नहीं किया था। इसके बावजूद कथित रूप से उसी दस्तावेज के आधार पर बैंक खातों का संचालन किया गया और करोड़ों रुपए का लेन-देन किया गया। 4. फोरेंसिक जांच में फर्जीवाड़े का दावा अरुण शर्मा ने बताया कि इन संदिग्ध दस्तावेजों की जांच भारतीय फोरेंसिक प्रयोगशाला से करवाई गई। जांच रिपोर्ट में हस्ताक्षरों और दस्तावेज में साफ तौर पर हेराफेरी सामने आई है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका उपयोग असली दस्तावेज की तरह किया गया और इसी आधार पर बैंक खातों से बड़ी रकम निकाली गई। 5. जीएसटी रिकॉर्ड में बदलाव कराने का भी आरोप अरुण शर्मा ने कहा- कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर फर्म के GST रिकॉर्ड में भी बदलाव कराया गया। पिता के निधन के बाद फर्म के जीएसटी पंजीकरण में वरुण शर्मा को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) के रूप में दर्ज करा दिया गया, जबकि इसके लिए उनके पास कोई वैध अनुमति या अधिकार नहीं था। 6. बाजार की रकम और कारोबार पर कब्जे का आरोप अरुण शर्मा ने कहा- केवल बैंक खातों की राशि का ही नहीं, बल्कि व्यापार से जुड़े लेन-देन और बाजार में फर्म के नाम पर बकाया रकम पर भी अवैध रूप से कब्जा किया है। बैंक खातों से निकाली गई राशि के अलावा बाजार से वसूली गई रकम और अन्य कारोबारी लेन-देन को मिलाकर कुल आर्थिक नुकसान 6 करोड़ रुपए से अधिक का है।