राजस्थान में बारिश-ओले गिरने से फसलें उजड़ गई और गेहूं की खेती बर्बाद हो गई। ईसबगोल की 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई। किसानों का कहना है कि अब तो घर में खाने का भी संकट हो गया। शुक्रवार को बीकानेर-नागौर में बारिश के साथ गिरे ओलों की चादर सी बिछ गई थी। बीकानेर कलेक्टर निशांत जैन ने अफसरों को नुकसान का सर्वे कर जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश हैं। पढ़िए राजस्थान में फसल खराबे की ये ग्राउंड रिपोर्ट… पहले देखिए बीकानेर की ये 2 तस्वीरें… खेत में जमी बर्फ, सिल्लियां निकाल रहे किसान बीकानेर के लूणकरणसर, अरजनसर और महाजन इलाके में शुक्रवार को ओले गिरे, खेतों में बर्फ की चादर बिछ गई। किसानों ने खेत से निकली बर्फ की सिल्ली दिखाई। ये भी दिखाया कि अब तक जड़ों में बर्फ जमी है। अरजनसर के किसान शिव कुमार शर्मा कहते हैं- बीकानेर में गेहूं, ईसबगोल और तारामीरा की फसलें खेत में कटाई के लिए पड़ी थी तो कुछ कटी हुई रखी थी। लूणकरणसर, अरजनसर के किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बीकानेर से श्रीगंगानगर तक फसल बर्बाद शिव कुमार कहते हैं- लूणकरणसर तहसील के रामसरा, चक असरासर, चक 99 आरडी, चक 103 आरडी, नया खानीसर और चक जोड़ तक फसलें खराब हुई हैं। इसके आगे श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ तक इसका असर हुआ है। सूरतगढ़ के मोकलसर, चक 79, चक 85, चक 92 आरडी और राजियासर गांव की रोही में भी ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। यह पूरा क्षेत्र एक पट्टी के रूप में प्रभावित हुआ है। ये पूरा एरिया करीब 175 किमी का है। शिव कुमार कहते हैं- मैंने 50 बीघा में गेहूं की फसल की थी। ये कटने को तैयार थी, इससे पहले आसमान से बरसी आफत ने पूरा नुकसान कर दिया। मेरी 100 फीसदी फसल खराब हो गई। फसल बर्फ के नीचे दब गई ठीक ऐसी ही स्थिति महाजन क्षेत्र के किसान शक्ति सिंह की है। शक्ति सिंह कहते हैं- मैंने 50 बीघा जमीन पर गेहूं की बुवाई की थी। बीच-बीच में हुई बारिश से फसल अच्छी तरह पक चुकी थी और जल्द ही अच्छी कमाई की उम्मीद थी। शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि ने सब बर्बाद कर दिया। मेरा पूरा खेत बर्फ से ढक गया। जो गेहूं की फसल 1 दिन पहले तक खड़ी थी, वह बर्फ के नीचे दब गई। किसान के 750 क्विंटल गेहूं नष्ट लूणकरणसर के किसान नरेंद्र कड़वासरा बताते हैं- इस पूरे इलाके में 500 बीघा के इलाके में फसल बर्बाद हो गई है। एक बीघा में औसतन 15 क्विंटल गेहूं होता है। इस हिसाब से 50 बीघा वाले किसान की करीब 750 क्विंटल गेहूं की उपज नष्ट हो गई। किसान को लाखों का नुकसान हुआ है। देखिए नागौर की ये 2 तस्वीरें… 150 बीघा में से 10 बीघा में ही फसल बची राजस्थान में सबसे ज्यादा ईसबगोल नागौर में होता है। कृषि विभाग के अनुसार, 50 फीसदी हिस्सा नागौर के पास है। पिछले दिनों हुई बारिश से यहां ईसबगोल की लगभग 70% फसल खराब हो चुकी है। किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। नागौर के डेगाना के चुई निवासी किसान पप्पूराम कहते हैं- उन्होंने 150 बीघा में ईसबगोल की बुवाई की थी। फसल खेत में खड़ी थी, आशा थी कि इस बार अच्छे दाम आ जाएंगे, लेकिन हवा और बारिश ने सब मिट्टी मिला दिया। 17 लाख लागत के 40 लाख आने की उम्मीद थी। सारी उम्मीद धरी रह गई। पप्पूराम कहते हैं- 150 बीघा में से केवल 10 बीघा ही फसल बच पाई है। पंजाब से आकर ईसबगोल की खेती की, कुछ नहीं बचा नागौर में खेत किराए पर लेकर पंजाब से आए किसान इकबाल ने बताया- इस बारिश ने ईसबगोल की उपज आधी कर दी है। इकबाल ने बताया- सुरपालिया में 120 बीघा खेत किराए पर लिया था। उम्मीद थी कि 30 लाख रुपए का मुनाफा होगा। बारिश और हवा ने सब बर्बाद कर दिया। 12 लाख रुपए तो लगा चुके हैं। मजदूरों और अन्य खर्चों के भी लगाने पड़ेंगे। यहां आकर खेती करना इस बार घाटे का सौदा रहा। राज्य का आधा ईसबगोल अकेले नागौर में नागौर कृषि विस्तार अधिकारी शंकर राम सियाक ने बताया- राजस्थान का आधा ईसबगोल नागौर में होता है। इसके अलावा जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों में भी इसकी खेती होती है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। देखिए बूंदी की ये तस्वीर… घर में खाने का संकट हो गया बूंदी और नैनवां क्षेत्र में भी बारिश और ओलों ने किसानों की पूरे साल की उम्मीद तोड़ दीं। लाम्बाबरडा निवासी किसान रामनारायण माली ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर नैनवां के हनुवंतपुरा में 90 बीघा जमीन बंटाई पर लेकर गेहूं की फसल की थी। फसल पूरी तरह पक चुकी थी और कटाई की तैयारी चल रही थी, तभी बरसात और ओलावृष्टि ने सब कुछ खत्म कर दिया। उन्होंने बताया कि अब हालात ऐसे हैं कि घर में खाने तक का संकट खड़ा हो गया है, जबकि दो बेटियों की शादी भी करनी हैं। ब्याज पर पैसे लेकर खेती की थी। पॉलीहाउस भी बर्बाद हुए इसी तरह गांव बिजलबा में भी ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। किसान सोभागमल मीणा ने बताया कि उनके दो पॉलीहाउस भी ओलावृष्टि की चपेट में आ गए। एक में लाल-पीली शिमला मिर्च और दूसरे में सब्जियों की फसल थी, जो नष्ट हो गई। इसके अलावा एक हेक्टेयर कलौंजी और आधा हेक्टेयर से अधिक गेहूं की फसल भी पूरी तरह खराब हो गई। बरसात-ओलावृष्टि से नैनवां ,चेनपुरिया, बीजलबा, हनुवंतपुरा, धानुगांव, भावपुरा, पांडुला, बंबूली, अरण्या, बामन गांव के आसपास के क्षेत्र में नुकसान हुआ है। फसल खराबे की ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में बारिश-ओलावृष्टि से फसल बर्बाद:जीरा काला पड़ा, खेतों में सड़ने लगा गेहूं; कृषि मंत्री किरोड़ीलाल बोले- मुआवजा मिलेगा राजस्थान में आसमान से आफत बरसी है। मार्च की सुनहरी धूप में पककर तैयार खड़ी रबी की फसलें अब काली पड़ चुकी हैं। कहीं ओलों ने बालियां झड़ा दीं, तो कहीं बेमौसम बारिश ने खेतों को तालाब बना दिया। (पढ़ें पूरी खबर)