राजस्थान के बांसवाड़ा के 18 गांवों के छोटी जोत के किसान अब मजदूर से मालिक बन गए हैं। उन्होंने मिर्च, टमाटर, गेंदा जैसी सब्जियां और फूल उगाकर अपनी आय दोगुनी से ज्यादा बढ़ा ली है। अब वे गुजरात-महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाकर मजदूरी नहीं करते। अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाने लगे हैं। इन गांवों में पलायन 30% तक घट गया है। आनंदपुरी क्षेत्र के करीब 250 से ज्यादा किसानों की एक सीजन में आय डेढ़ से दो लाख रुपए तक बढ़ गई है। वंडा गांव के किसान दिलीप बताते हैं, 3-4 साल से हर सीजन में 40-50 नए किसान नई फसलों की बुआई से जुड़ रहे हैं। इनमें 80 से 90 फीसदी किसान छोटी जोत वाले हैं। उद्यान विभाग भी किसानों को प्रशिक्षण दे रहा है
बांसवाड़ा के सहायक निदेशक (उद्यानिकी) बदामीलाल निनामा कहते हैं, आनंदपुरी क्षेत्र के जनजाति किसानों में तेजी से आ रहा यह बदलाव अच्छा है। कैश क्रॉप से छोटे किसान भी आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। विभाग विभिन्न मामलों में सब्सिडी और प्रशिक्षण भी दे रहा है। बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल और आनंदपुरी बीडीओ रितेश जैन कहते हैं, इन 18 गांवों से जनजाति समाज के किसान पहले मजदूरी करने महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में जाते थे। अब इनकी संख्या घटती जा रही है। केस-1: फलवा गांव में गीता देवी बामनिया अपने पति अमृत के साथ निराई-गुड़ाई कर रही थीं। वे बताती हैं- 3 साल से मिर्च-टमाटर और गेंदा उगा रहे हैं। साढ़े पांच बीघा खेत में पहले पारंपरिक फसलें उगाते थे। इससे मुश्किल से पेट पलता था। अब तो सब्जियां, मिर्च-टमाटर से ही रोज 500-600 रुपए कमा लेते हैं। केस-2: वरेठ गांव में कमला पारगी ने बताया- 3 साल से टमाटर, मिर्च, बैंगन उगा रहे हैं। इससे रोज कमाई होती है। पहले मजदूरी करने जाते थे। अब जरूरत नहीं। इस साल एक लाख रु. की शिमला मिर्च बेच चुके हैं।