पंजाब विधानसभा में बरनाला जिले की खराब स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाया गया। बरनाला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने सिविल अस्पताल सहित जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति पर सरकार से सवाल किए और सरकार की ‘सेहत क्रांति’ पर प्रश्नचिह्न लगाया। विधायक ढिल्लों ने विधानसभा में बताया कि, बरनाला का सिविल अस्पताल अब केवल “रेफर सेंटर” बनकर रह गया है। मामूली बीमारी और चोट के मरीजों को भी तुरंत फरीदकोट या पटियाला रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी है। साथ ही इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के पद भी बड़े पैमाने पर खाली पड़े हैं। उन्होंने जच्चा-बच्चा केंद्र में लंबे समय से बंद पड़ी बच्चों की नर्सरी का मुद्दा भी उठाया। विधायक ढिल्लों ने कहा कि उन्होंने पिछले सत्र में भी यह विषय उठाया था, लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है। दो महीने से बंद पड़ा है ब्लड बैंक : ढिल्लों विधायक ढिल्लों ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि बरनाला सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक दो महीने से अधिक समय से बंद पड़ा है। सिविल अस्पताल बरनाला के अलावा, विधायक ढिल्लों ने जिले के अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और आम आदमी क्लीनिकों की खराब स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने एक बार फिर बरनाला में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत सुपर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण की मांग की, जिसे लोगों की आवश्यकता के अनुसार बनाया जाना चाहिए। विधायक काला ढिल्लों ने विधानसभा में तथ्यों के साथ बरनाला जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की खराब स्थिति को उजागर किया। समस्याओं को हल कराने का पूरा प्रयास करेंगे इस मामले से संबंधित फोन पर बातचीत करते हुए विधायक ढिल्लों ने कहा कि उनकी ड्यूटी सिर्फ विधानसभा में मुद्दा उठाना नहीं है, बल्कि वे अपने द्वारा विधानसभा में उठाए गए मसलों को हल करवाने तक प्रयासरत रहेंगे।
बता दें कि जच्चा-बच्चा केंद्र की बंद पड़ी बच्चा नर्सरी का मुद्दा पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री के बरनाला दौरे के दौरान उठाया था, लेकिन इसके बावजूद भी इसका कोई समाधान नहीं हुआ और अब स्थानीय विधायक द्वारा यही मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया गया है।

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