बड़गांव प्राथमिक स्कूल परिसर में अंदर तक अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की सुस्ती नहीं टूट रही है। दूसरी ओर, अतिक्रमियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। शुक्रवार को भास्कर फिर मौके पर पहुंचा। सामने आया कि स्कूल के ठीक सामने कुछ वर्ष पहले यहां एक या दो कच्ची झोपड़ियां थी। धीरे-धीरे ये पक्के निर्माण में बदलती गईं। अब यहां 15 से 17 कच्चे-पक्के निर्माण हैं। स्कूल स्टाफ का कहना है कि हैंडपंप खराब होने से फिलहाल यहां नहाने-कपड़े धोने जैसे काम बंद हैं। लेकिन, कबाड़ व प्लास्टिक के ढेर, इन्हें जलाने जैसे काम जारी हैं। इससे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। चर्म रोग भी बढ़ रहे हैं। पहले यहां 50 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन दो साल में ये घटकर 17 रह गए। दूसरी ओर, अतिक्रमियों की दलील है कि ये बीते 80 वर्षों से यहां पर काबिज हैं। हमें यहां से कोई नहीं हटा सकता है। हम मजदूरी कर अपना व परिवार का पेट पाल रहे हैं। यहां रहने का कारण माताजी का मंदिर है। अतिक्रमियों ने कहा कि नेता चुनाव के दौरान उन्हें हर बार पट्टा देने का वादा करते हैं। हमें दूसरी जगह, जमीन दे दो, चले जाएंगे। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है 80 साल का दावा झूठा है। ये अतिक्रमण कुछ सालों में ही हुए हैं। इन परिवारों को विस्थापित करें : प्रशासक
“ये कालबेलिया परिवार हैं। इन्हे यहां से हटाकर किसी दूसरी जगह विस्थापित किया जाए। कुछ वर्ष पहले एक दो परिवार आएं थे। बाद में इन्होंने धीरे-धीरे स्कूल की जमीन पर ही पक्के भवन और झोपड़ियां खड़ी कर दीं। अब ये यहां से हटने को तैयार नहीं है।” -संजय शर्मा, प्रशासक, बड़गांव
