भवन्ज एसएल पब्लिक स्कूल में 113वां मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘एक सुरमई शाम-शिक्षकों के नाम’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना और उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना था। मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार उपस्थित रहे। उनकी धर्मपत्नी किरन शर्मा ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। भवन्ज कला केंद्र के समन्वयक विनोद शर्मा ने बताया कि इस सांस्कृतिक श्रृंखला की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जो आज 113वें पड़ाव तक पहुंच चुकी है। इस अवसर पर राज कुमार ठाकुर ने अपनी स्वरचित कविता ‘क्या ये शिक्षक गा सकते हैं’ प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन जीत लिया। संगीत प्रस्तुतियों की शुरुआत राकेश गुलाटी ने गीत ‘भरी दुनिया में आ के दिल’ से की। इसके बाद राज कुमार ठाकुर ने ‘हम बेवफा हरगिज न थे’, मनीष ने ‘पुकारता चला हूं मैं’ और ‘क्या हुआ तेरा वादा’ सुनाया। हरप्रीत ने ‘अजनबी कौन हो तुम’ और ‘दिल हूम हूम करे’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। युगल और समूह गीतों में ‘जानेमन तेरे दो नयन’, ‘मैं दुनिया भुला दूंगा’ और ‘हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें’ ने पूरे सभागार को तालियों से गूंजा दिया। मुख्य अतिथि राजेश कुमार शर्मा ने भवन्ज प्रबंधन समिति का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षकों और अभिभावकों को प्रेरित किया कि वे बच्चों को मोबाइल की अत्यधिक लत से बचाएं और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। भवन्ज के अध्यक्ष अविनाश महेन्द्रू ने सभी कलाकारों की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
