हरियाणा में फतेहाबाद जिले के पीलीमंदोरी गांव में अपनी बहन के पास रहने वाले रवि भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती हो गए हैं। छोटी सी उम्र में ही रवि के सिर से ही माता-पिता का साया उठ गया। मुश्किल हालात में भी रवि ने हिम्मत नहीं हारी और सेना में भर्ती होने के अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। इनका चयन 20 नवंबर को हुआ। मगर, उसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन व अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब ट्रेनिंग के लिए उत्तराखंड स्थित रुड़की रवाना हुए हैं। यहां ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें पोस्टिंग दी जाएगी। रवि मूल रूप से पंजाब में मानसा जिले की सरदूलगढ़ तहसील के झंडा खुर्द गांव के रहने वाले हैं। फिलहाल 2 साल से वह पीलीमंदोरी गांव में चचेरी बहन के यहां रहकर फौज में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे थे। रवि की उम्र महज 20 साल है, लेकिन उनके जीवन का संघर्ष बड़ा लंबा है। रवि बताते हैं- जब मैं आठवीं कक्षा में था, तब दूसरे बच्चों को मैदान में रनिंग करते देखता था। उसी दौरान फौजी बनने का सपना देखा। इसके बाद नियमित रूप से रनिंग करता रहा। तभी से एक ही लक्ष्य था कि मुझे सेना में भर्ती होना है। सिलसिलेवार जानिए.. रवि के संघर्ष की कहानी जीजा बोले- सुबह 4 बजे दौड़ने जाता था
दीपक ने बताया कि रवि ने नियमित रूप से तैयारी की। सुबह-शाम स्टेडियम में दौड़ लगाई। सुबह 4.30 बजे उठकर दौड़ लगाने जाता था। शाम को 4-5 बजे फिर से स्टेडियम पहुंच कर तैयारी में जुट जाता था। पढ़ाई और मैदान पर तैयारी, बस इन दो ही बातों पर उसका पूरा फोकस रहा। उनके खुद के बेटा-बेटी भी नियमित रूप से तैयारी करते हैं। वह खेलों में भी अपना दमखम दिखा रहे हैं। अब रवि दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बना है।