भास्कर न्यूज | जालंधर बचपन में अक्सर ही छुट्टियों में दादी-नानी कपड़ों पर सूई धागे से कढ़ाई कर नाम लिखना या फूल पत्ते बनाना सिखाती थी। वहीं, अब भी लोग इसे सीखने के लिए क्लासेस में जाते हैं। रविवार को ऐसी ही वर्कशाप हुई जिसमें लोगों को नई तकनीक से कढ़ाई करना सिखाया गया। इसका नाम रखा गया था पंच नीडल। यह एक खास तरह का पैन जैसे दिखने वाले टूल होता है, जिसमें सूई लगी होती है। उसमें धागा लगाकर जैसे-जैसे कपड़े में उसे दबाते हैं वैसे-वैसे कढ़ाई होती रहती है। वर्कशॉप में शामिल लर्नर्ज ने कपड़ों पर फूल, पत्ते, पांडा व हाथी बनाए। हम पुराने आर्टवर्क को नए तरीके से सिखाते हैं इंस्ट्रक्टर रवनीत ने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसी एक्टिविटीज के साथ लोगों को मोबाइल से दूर करना भी है। हम पुराने आर्टवर्क को नए तरह से सिखाते हैं ताकि आजकल के बच्चे भी इससे कनेक्ट हो। कुछ लोग वर्कशॉप से सीख कर अपना काम भी करने लगे हैं। इवेंट में 3 साल के बच्चे से लेकर 85 साल के बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। वर्कशाप में कपूरथला से आई प्रभनूर अपनी मां के साथ आई थी। जिन्होंने पिलो कवर पर हाथी के साथ गुब्बारे की कलाकृति बनाई। उनका कहना था कि इस तरह की एक्टिविटीज से नई नई चीजें सीखने को मिलती हैं। ^ बलविंदर कौर का कहना था कि बचपन में वह अपना मां से सीखती थी और आज यहां आकर उन्हें वही समय याद आ गया। स्कूल में भी हमें यह सिखाते थे। उन्होंने वहां एक चिड़िया व फूल के आकार की कढ़ाई की। ^ जेपी नगर की पल्लवी ने कहा कि वीकएंड में इस तरह की गतिविधियों से दिमाग फ्रैश व रिलैक्स रहता है। कुशन पर पांडा की आकृति बनाते हुए उन्होंने कहा कि जब आप खुद से चीजें बनाते हैं तो सुकून मिलता है।