पंजाब के फाजिल्का के डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के बाहर मुलाजिम एकता संघर्ष कमेटी के लोग एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर वह संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर फिर भी सुनवाई न हुई तो भूख हड़ताल के बाद वह मरणाव्रत पर बैठ जाएंगे। मुलाजिम एकता संघर्ष कमेटी के पदाधिकारी मास्टर दपिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले वायदा किया गया था कि सत्ता में आने के बाद पहल के आधार पर कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव पारित कर पुरानी पेंशन को बहाल किया जाएगा। इसको लेकर 2 सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव भी पारित किया, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया। पंजाब स्तर पर किया जा रहा है संघर्ष मास्टर दपिंदर सिंह ने कहा कि इस संघर्ष को पंजाब स्तर पर किया जा रहा है। आज भी उनके साथी जो सरकारी स्कूलों में अध्यापक है। वह स्कूलों से छुट्टी लेकर आ रहे है और इस भूख हड़ताल में शामिल होंगे। उधर प्रदर्शनकारी दलजीत सिंह सभरवाल ने बताया कि 2004 के बाद जितनी भी भर्ती हुई है उसपर केंद्र सरकार ने पेंशन स्कीम एनपीएस लगाई थी। जिसका विरोध हुआ था। मरणाव्रत की दी चेतावनी अब एनपीएस को यूपीएस में बदल दिया गया है। जिसका भी विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी 1972 वाली पुरानी पेंशन की मांग कर रहे है। जो तब तक होगी जब तक उनकी सुनवाई नहीं होती। आज बुधवार को डीसी दफ्तर के बाहर वह संघर्ष कर रहे है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार फिर भी न मानी तो यह प्रदर्शन मरणाव्रत में भी बदल सकता है।
