जालोर जिले में फर्जीवाड़ा कर पुलिस कॉन्स्टेबल बने 37 कर्मचारियों के खिलाफ SOG ने FIR दर्ज की है। इन लोगों ने डमी कैंडिडेट बैठाए और फेक डॉक्यूमेंट देकर नौकरी हासिल की थी। जांच के दौरान हस्ताक्षर (साइन) मिसमैच होने पर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड राजस्थान ने जुलाई-2024 में जालोर एसपी को एक लेटर भेजा था। इसमें पिछले 5 सालों में की गई भर्तियों में फर्जी शैक्षणिक योग्यता के डॉक्यूमेंट देने और परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के संबंध में जांच करने के लिए था और संदिग्धों की लिस्ट बनाकर एसओजी को भिजवाने के आदेश दिए थे। जालोर एसपी ने जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। जांच के दौरान 37 पुलिस कॉन्स्टेबल के फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी हासिल करने का पता चला। एसपी की भेजी लिस्ट के आधार पर एसओजी ने इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज की है। 26 कॉन्स्टेबल के सिग्नेचर मिस मैच
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि साल-2018 की भर्ती में सिलेक्ट 26 पुलिस कॉन्स्टेबल के भर्ती के समय किए हस्ताक्षर और वर्तमान समय में किए हस्ताक्षर में डिफरेंस पाया गया है। इसके आधार पर कॉन्स्टेबल जैसाराम, दिनेश कुमार, अर्जुन कुमार, घेवरचंद, यशवंत सिंह, दिनेश कुमार, बदराम, गोपीलाल, हरीश कुमार, नरपत सिंह, दिनेश कुमार, नपाराम, सुरेश कुमार, चतराराम, सुरेश कुमार, भाणाराम, रमेश कुमार, सुशीला कुमारी, शांतिलाल, देवी सिंह, जितेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, मुकेश कुमार, डूंगराराम, रेवंतीरमन और खुशीराम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 11 कॉन्स्टेबल खिलाफ दर्ज हुई दूसरी FIR
एसपी जालोर की ओर से गठित जांच कमेटी ने डमी कैंडिडेट और फेक डॉक्यूमेंट को लेकर जांच की। इस दौरान आवेदन पत्र, फोटो, सिग्नेचर की भली-भांति जांच की गई। इसमें कॉन्स्टेबल प्रदीप कुमार, अनिल कुमार, संजय कुमार, धनवत्नी, प्रियंका, ललिता, निरमा, सपना शर्मा, संदीप कुमार, पंकज कुमार और सोहनलाल के सिग्नेचर मिसमैच मिले। एसओजी ने इन 11 कॉन्स्टेबल के खिलाफ दूसरी FIR दर्ज की है।

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