मानसरोवर वीटी रोड मेला ग्राउंड में चल रही शिवमहापुराण कथा के छठे दिन प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति जितनी ऊंचाई पर बैठता है, उसे उतनी ही आलोचना, गालियां और ताने सुनने पड़ते हैं, इसलिए बड़े पद पर बैठने वाले व्यक्ति को गंभीर रहना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की दृष्टि में भगवान शंकर कितने सरल लगते हैं, एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन जो व्यक्ति जितनी ऊंचाई पर बैठता है, उसको उतना गंभीर होना पड़ता है। जो व्यक्ति जितनी ऊंचाई पर बैठता है, उसकी उतनी ही आलोचना होती है। जो व्यक्ति जितना ऊपर की ओर बढ़ता जाता है, उसको उतनी ही गालियां दी जाती हैं, ताने दिए जाते हैं, अपशब्द कहे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति तरक्की करके ऊंचाइयों पर जाकर बैठ जाता है, उसकी आलोचना होगी, अपशब्द कहे जाएंगे, ताने दिए जाएंगे, गालियां दी जाएंगी, लेकिन उसको गंभीर होना पड़ेगा। जैसे हमारे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी। जैसे आपके या मध्यप्रदेश या चाहे किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री हों।
बड़े पद पर गंभीरता और सहन करने की ताकत जरूरी
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शंकर देव नहीं, महादेव हैं। ऊंचे पद पर बैठे हैं इसलिए वे गंभीर हैं और सब सहते हैं। तुम जब ऊंचे पद पर बैठो तो दुनिया की आलोचना, गाली, ताने और अपशब्द सहन करना सीख लो। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हो सकता है कि मेरी बात कई लोगों को बुरी लग जाए। अब लग जाए तो लग जाए। लेकिन हमें इस बात को समझना होगा कि जो ऊंचे पद पर बैठ गया। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति जैसे बड़े पद पर जो बैठ जाता है। उसकी आलोचना होती है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति का पद कितना ऊंचा होता है। लेकिन जो जितने ऊंचे पद पर बैठ जाते हैं, उन्हें उतनी ही गंभीरता लानी पड़ती है। उनको मालूम होता है कि ऊपर बैठेंगे, उन्नति की सीढ़ी पर चढ़ेंगे तो लोग गालियां बहुत देंगे, आलोचना बहुत करेंगे, अपशब्द बहुत कहेंगे, ताने बहुत देंगे, ना जाने क्या-क्या कमेंट्स करेंगे, क्या-क्या लिखेंगे।
उन्होंने कहा कि जितनी ऊंची कुर्सी पर आदमी बढ़ता जाता है, उतनी उसमें गंभीरता आती जाती है। उसमें आलोचना, अपशब्द और ताने सुनने का उतना ही बल उत्पन्न होता जाता है। वह सुनता ज्यादा है। जवाब कम देता है।
छोटे पद पर बैठे लोगों से आलोचना सहन नहीं होती
प्रदीप मिश्रा ने कहा- कहां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति ऊंचे पद पर बैठा है। लेकिन कोई जो छोटे पद पर बैठा होता है, उसकी आलोचना करके देख ले। अपने ही पास में जो पार्षद रहते हैं उनकी आलोचना करके बता दो, फिर वह पकड़ कर ले जाएंगे और प्रसाद दे देंगे।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अभी-अभी ऊंचे पद पर चढ़ा है, धीरे-धीरे आगे बढ़ा है, उसकी जब आलोचना होती है तब उससे सहन नहीं होता है। आलोचना करने वाले को पकड़ कर ले जाते हैं, कमरे में बंद कर देते हैं।
जब राष्ट्र पर संकट आए तो जाति-धर्म भूलकर एक हो जाओ कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कहा – जब दुख आता है तो सबको एकजुट हो जाना चाहिए। कोरोना महामारी जब आई थी तब भारत में निवास करने वाला चाहे ब्राह्मण हो क्षत्रिय हो चाहे वैश्य हो शूद्र हो। भारत की भूमि पर निवास करने वाला चाहे किसी भी धर्म का हो या किसी भी वर्ण का हो। जब कोरोना महामारी आई थी, तब भारत में रहने वाला एक-एक व्यक्ति एक दूसरे के प्रति समर्पित हो गया था। यही राष्ट्र में होना भी चाहिए। भारत पर अगर तकलीफ आए तो हम सबको यह नहीं सोचना चाहिए कि हम किस जाति – धर्म से आते हैं। हमें एक होकर उस दु:ख का सामना करना है। रात को चार गुना बढाया गया पांडाल प्रदीप मिश्रा ने कहा – जयपुर में कथा हो रही है तो इस दिल से सुने। आप लोगों को तो पंडाल के अंदर जगह भी मिल गई। काफी सारे लोग धूप में छाता लगाकर बच्चों को गोदी में लेकर सड़कों पर बैठे हैं। किसी को जगह नहीं मिली तो वह यात्री प्रतीक्षालय में ही बैठकर कथा सुन रहा है। पंडाल में जगह नहीं है।
मैं जयपुर नगर के प्रशासन यहां की सरकार और यहां के कलेक्टर, आईजी, डीआईजी, कमिश्नर, एसपी को भी धन्यवाद दूंगा। उन्होंने समिति से कहकर रात को चार गुना पंडाल और बढ़ावा दिया ताकि भक्त आसानी से बैठ सके। बहू पढ़ाओ और देश बचाओ
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हमारी सोच ही गलत हो जाती है। बेटी को पढ़ाने की बात होती है, लेकिन बहू पढ़ना चाहती है तो लोग पीछे हट जाते हैं। बहू भी किसी की बेटी है, उसे भी पढ़ने और आगे बढ़ने का हक है।
उन्होंने बताया कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की तरह बहू पढ़ाओ और देश बचाओ की सोच अपनानी चाहिए। कल सुबह 8 बजे से होगी कथा कथा में आज शिवरात्रि का प्रसंग सुनाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आज रात भी कथा स्थल पर ही रुकेंगे। वहीं अंतिम दिन गुरुवार को कथा बदले हुए समय के अनुसार सुबह 8 बजे से 11 बजे तक होगी, जिसके बाद कथा का समापन किया जाएगा।
