प्रदेश में वन अधिकार कानून के तहत जंगल की जमीनों पर कई सालों से बसे जनजाति वर्ग के लोगों को उसका मालिकाना हक देने के लिए पट्टों के 66213 आवेदन सरकार ने खारिज कर दिए हैं। 18 जिलों में ‘वन अधिकार कानून’ के तहत पट्टे लेने के लिए आवेदन किए गए थे, जिनमें जयपुर में समेत 5 जिलों में सभी आवेदन खारिज कर दिए हैं। सरकार खारिज किए गए आवेदनों पर अब फिर से विचार भी नहीं करेगी। सीकर सांसद अमराराम ने इसे लेकर 2 अप्रैल को लोकसभा में सवाल किया था, जिस पर जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास ने जवाब दिया। सीकर सांसद अमराराम ने जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उड़के सवाल किया- 1- राजस्थान में अब तक वन अधिकार अधिनियम [अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006] के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की संख्या, जारी किए गए पट्टों की संख्या और अस्वीकृत किए गए आवेदनों की संख्या का जिला-वार ब्यौरा क्या है? 2- क्या सरकार का विचार अस्वीकृत आवेदनों को पुनः खोलने का है? 3- यदि हां, तो इसके लिए क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है? 4- यदि नहीं, तो राजस्थान सरकार द्वारा उक्त आवेदनों को पुनः नहीं खोलने के क्या कारण हैं, जबकि महाराष्ट्र सरकार की ओर से पहले ही ऐसा उपाय किया जा चुका है? खारिज आवेदनों पर फिर से विचार नहीं करेगी सरकार जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उड़के ने बताया कि वन अधिकार कानून ( एफआरए) के तहत राजस्थान में फरवरी 2026 तक कुल 1,18,675 आवेदन मिले थे, जिनमें से कुल 51,775 आवेदनों को मंजूर कर जमीनों का मालिकाना हक के पट्टे दिए गए। 66,213 आवेदन खारिज किए गए हैं। खारिज किए आवेदनों को फिर से खोलने के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा- राजस्थान सरकार ने सूचित किया है कि सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी और 28 फरवरी 2019 के आदेशों की पालना में खारिज किए गए आवेदनों के दावों की समीक्षा की गई थी, जिसमें 4740 व्यक्तिगत और 34 सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी किए गए थे। वर्तमान में खारिज किए गए आवेदनों की समीक्षा का मामला विचाराधीन नहीं है। जयपुर सहित 5 जिलों में 100 फीसदी आवेदन खारिज 5 जिलों में वन अधिकार कानून के तहत सभी आवेदन खारिज कर दिए गए, वहां किसी को वन अधिकार कानून के तहत पट्टा नहीं दिया गया। सवाई माधोपुर, जयपुर, टोंक, धौलपुर और अलवर में अभी तक एक भी पट्टा जारी नहीं हुआ है। सवाईमाधोपुर में 121, जयपुर में 98, टोंक में 245, धौलपुर में 94 और अलवर में 528 लोगों ने वन अधिकार कानून के तहत जमीन का हक लेने के लिए पट्टों का आवेदन किया था। इन पांच जिलों में 100 फीसदी आवेदन खारिज कर दिए गए। प्रतापगढ़ में सबसे ज्यादा आवेदन खारिज, पट्टे देने में बांसवाड़ा पहले, उदयपुर दूसरे और प्रतापगढ़ तीसरे नंबर पर वन अधिकार कानून के तहत आवेदन करने और खारिज होने दोनों में प्रतापगढ़ जिला टॉप पर है जबकि पट्टे देने में बांसवाड़ा सबसे आगे है। प्रतापगढ़ में सबसे ज्यादा 33,244 लोगों ने पट्टों के लिए आवेदन किया, जिनमें से 22568 आवेदन खारिज हो गए। पट्टे जारी करने में दूसरे नंबर पर बांसवाड़ा है, जहां 28435 आवेदन आए और 15,551 लोगों को पट्टे जारी किए हैं। उदयपुर पट्टे जारी करने में तीसरे नंबर पर है जहां 22533 लोगों ने आवेदन किए, जिनमें से 12758 लोगों को पट्टे जारी किए गए।