टोंक के सरकारी अल्पसंख्यक आवासीय स्कूल में क्लास 7वीं में पढ़ने वाले 12 वर्षीय छात्र अरशद खान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में शनिवार को परिजनों और परिचितों ने छात्रावास के बाहर धरना शुरू कर दिया। परिजनों ने छात्रावास के गार्ड समेत अन्य जिम्मेदार कार्मिकों पर हत्या का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने और मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इस बीच परिजनों का दावा है कि घटना के समय छात्रावास में मौजूद गार्ड मौके से फरार हो गया। जबकि घटना के बाद अधिकांश छात्र अपने-अपने गांव चले गए। मामले की जानकारी मिलने पर जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण अधिकारी नितेश जैन भी मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे परिजनों से समझाइश की। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, परिजन उनकी समझाइश से संतुष्ट नहीं हुए और देर रात तक धरने पर बैठे रहे। परिजनों ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। धरने में रालोपा के देवली ब्लॉक अध्यक्ष रणवीर सिंह भी मृतक के परिजनों के साथ बैठे हैं। दादी ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृतक की दादी दूनी निवासी शमीम बानो ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे पत्र में बताया कि उनका पोता अरशद खान करीब दो सालों से राजकीय अल्पसंख्यक बालक आवासीय स्कूल, टोंक में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि 7 सितंबर की रात अरशद की तबीयत बिगड़ी थी। साथी स्टूडेंट्स से बातचीत में उन्हें जानकारी मिली कि अरशद ने गार्ड को तबीयत खराब होने की बात बताई थी। आरोप है कि गार्ड ने उसे एक गोली देकर सो जाने और अगले दिन डॉक्टर को दिखाने की बात कही। दादी के अनुसार, इसके बाद अरशद की तबीयत में सुधार नहीं हुआ और 8 सितंबर की सुबह उसकी हालत और बिगड़ गई। बाद में चार लोग उसे हाथ-पैर पकड़कर हॉस्टल से ऑटो तक ले गए और सीट के नीचे लिटाकर सआदत अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल प्रशासन की ओर से सुबह करीब साढ़े सात बजे उन्हें फोन कर बताया गया कि बच्चा बीमार है और उसे हार्ट अटैक आया है, इसलिए वे जल्द अस्पताल पहुंचें। जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने अरशद को मृत बताया। घटना के बाद नहीं दी गई स्पष्ट जानकारी
शमीम बानो ने पत्र में आरोप लगाया कि घटना के बाद परिवार को उचित और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और आश्वासन देकर उन्हें घर भेज दिया गया। बाद में अरशद के साथ पढ़ने वाले छात्रों से बातचीत में घटना को लेकर कई जानकारियां सामने आईं, जिससे स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली और छात्र की देखभाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दादी ने कहा कि आवासीय स्कूल में 12 वर्षीय बच्चे की इस तरह मौत होना बेहद गंभीर मामला है। परिवार यह जानना चाहता है कि अरशद की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं दी गई और अस्पताल पहुंचाने में कितना समय लगा। CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
परिजनों ने स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए 7 सितंबर की शाम से 8 सितंबर की सुबह तक की पूरी मूल रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटेज से अरशद की तबीयत बिगड़ने से लेकर उसे अस्पताल ले जाने तक का पूरा घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है। परिजनों ने मांग की है कि CCTV फुटेज को हटाने, बदलने या उसके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने के लिए रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित कराया जाए। फुटेज की स्वतंत्र और सक्षम जांच अधिकारी या समिति से जांच कराई जाए और इसकी रिपोर्ट परिवार को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि CCTV फुटेज के आधार पर यह जांच की जाए कि अरशद की बीमारी के दौरान उसके साथ क्या हुआ, उसे किस प्रकार की चिकित्सा सहायता दी गई, अस्पताल ले जाने में कितना समय लगा और स्कूल प्रशासन व संबंधित कर्मचारियों ने क्या कदम उठाए। जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या स्कूल प्रशासन की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। परिजनों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।