बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को हाईकोर्ट से झटका लगा हैं। जस्टिस रवि चिरानिया की अदालत ने आज पूर्व विधायक की जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 25 जून को दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बलजीत यादव को ईडी ने स्थानीय क्षेत्र विकास फंड (MLA Fund) से 3 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के दुरुपयोग और गबन के आरोप में 3 फरवरी को गिरफ्तार किया था। ईडी मामलों की विशेष अदालत ने 25 अप्रेल को बलजीत यादव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद पूर्व विधायक की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी। ईडी ने कहा-गबन की राशि से संपत्तियां खरीदी
बहस के दौरान ईडी ने कहा कि इस मामले में एसीबी ने 12 दिसंबर 2024 को बलजीत यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। जिसके बाद ईडी ने उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज करके मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि जिन फर्मों को काम के ठेके दिए गए वो वर्क ऑर्डर मिलने के बाद बनाई गई अथवा उनके जीएसटी पंजीकरण फर्जी थे। इन फर्मों के जरिए धनराशि यादव के सहयोगियों और रिश्तेदारों तक पहुंचाई गई। ईडी ने कहा कि बलजीत यादव ने गबन के 2.78 करोड़ रुपए से संपत्तियों की खरीद और राजनीतिक खर्चा किया। यह था घोटाला
2021 में बलजीत यादव ने विधायक रहते हुए अलवर के 32 सरकारी स्कूलों में क्रिकेट बैट, बैडमिंटन किट और अन्य सामग्री खरीदी में भूमिका निभाई थी। आरोप है कि सामान ढाई-तीन गुना ज्यादा कीमत पर खरीदा। सामग्री घटिया क्वालिटी की थी। 3.72 करोड़ की हेराफेरी में यादव की भूमिका थी। इस केस में बालाजी कम्पलीट सोल्यूशन्स प्रा. लिमिटेड, सूर्या इंटरप्राइजेज, राजपूत स्पोर्ट्स इंटरप्राइजेज, शर्मा स्पोर्ट्स इंटरप्राइजेज के संचालक व शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए हैं।