चूरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार ने खुद पीपीई किट पहनकर मधुमक्खियों के छत्ते हटाए।
इस दौरान करीब 5 घंटे में कड़ी मशक्कत के बाद कॉलेज ​बिल्डिंग से 7 बड़े मधुमक्खियों के छत्तों के हटाया गया। इस काम के लिए रविवार का छुट्टी का दिन चुना गया, ताकि स्टूडेंट्स को भी परेशानी नहीं हो। मधुमक्खियों ने सिक्योरिटी गार्ड पर किया था हमला
मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग में बने इन छत्तों के कारण छात्रों पर बड़े हमले का खतरा मंडरा रहा था। 3 अप्रैल की रात में एक सिक्योरिटी गार्ड पर ड्यूटी के दौरान मधुमक्खियों ने हमला किया था, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। PHOTOS में देखिए कैसे प्रिंसिपल ने हटाए छत्ते किसी ने हामी नहीं भरी तो प्रिंसिपल खुद उतरे मैदान में
कॉलेज में संभावित खतरे को देखते हुए डॉ. पुकार ने छत्तों को हटाने की योजना बनाई। उन्होंने जिले में मधुमक्खी के छत्ते हटाने वाले विशेषज्ञों से संपर्क किया, लेकिन मधुमक्खियों के बढ़ते हमलों के कारण किसी ने भी यह काम करने की हामी नहीं भरी। इसके बाद डॉ. पुकार ने स्वयं यह जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। 5 घंटे में सभी 7 छत्तों को हटाया
रविवार को अवकाश का दिन होने के कारण डॉ. पुकार ने व्यक्तिगत रूप से पीपीई किट पहनकर छत्तों को हटाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने लगभग 5 घंटे तक लगातार काम करते हुए कॉलेज बिल्डिंग से सभी 7 छत्तों को सफलतापूर्वक हटा दिया।
पीपीई किट पहनने वाली टीम में प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार, सेंट्रल लैब इंचार्ज डॉ. नदीम, मैस कर्मचारी सुमेर और कॉलेज कर्मचारी जगदीश वार्ड बॉय शामिल थे। इस दौरान सिक्योरिटी गार्ड नेमीचंद, इंतजार खान, सिक्योरिटी गार्ड इंचार्ज कैप्टन रघुवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट वेदप्रकाश खींची और सफाई कर्मचारी पूजा भी इस अभियान में शामिल थी। हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स को शिफ्ट करवाया
अभियान शुरू करने से पहले प्रिंसिपल पुकार ने मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रहने वाले सभी स्टूडेंट्स को दूसरी जगह कुछ देर के लिए शिफ्ट करवाया। उसके बाद छत्तों से मधुमक्खियां को उड़ाया। जिन स्थानों पर छत्ते लगे हुए थे, वहां पर केमिकल और डीजल का छिड़काव किया गया। हॉस्टल से छत्ते हटाने का काम रविवार दोपहर करीब 1 बजे शुरू किया, जो शाम करीब 6 बजे पूरा हुआ। गर्ल्स हॉस्टल में 3 और बॉयज हॉस्टल में 4 छत्ते थे
मधुमक्खियां के छत्ते गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल में थे। गर्ल्स हॉस्टल में 3 और बॉयज हॉस्टल में 4 छत्ते थे। यह हॉस्टल 2018 में बनकर तैयार हुए थे, जो 4 मंजिला है। ‘छात्रों पर मंडरा रहे खतरे को टाला’
डॉ. पुकार ने बताया कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अक्सर मधुमक्खी के हमले से घायल लोग आते हैं। अधिकतर हमले खेतों में होते हैं, जहां घायलों की संख्या सीमित रहती है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की अलग-अलग बिल्डिंगों में बने इन 7 बड़े छत्तों से सैकड़ों मेडिकल छात्रों के घायल होने का बड़ा खतरा था, जिसे उन्होंने समय रहते टाल दिया।
इस कार्य में सेंट्रल लैब प्रभारी डॉ. नदीम, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट वेदप्रकाश खीची, सिक्योरिटी सुपरवाइजर रघुवीर सिंह, सहायक छोटू, प्रीतम और पूजा ने भी सहयोग किया। 1 महीने में 36 से ज्यादा लोग घायल हुए
दरअसल जिले में इन दिनों मधुमक्खियों का आतंक बढ़ा हुआ है। पिछले 1 महीने में मधुमक्खियों के हमलों से 36 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है। अब जानिए जानलेवा मधुमक्खियों के बारे में एक्सपर्ट बताते हैं कि जंगल में मधुमक्खी का महत्व काफी ज्यादा है। अन्य वन्यजीवों की तरह यह भी कुछ समय के लिए हिंसक हो जाती है। शहद बनाने के पीक समय में मधुमक्खियां काफी हिंसक हो जाती हैं। अपने आस-पास लोगों की भीड़ को खतरा समझ कर हमला कर देती हैं। कई बार ठंड में बादल छाने पर खेतों में धुआं किया जाता है, इस दौरान भी मधुमक्खियां हमला करती हैं। मधुमक्खियों के बारे में ये फैक्ट भी जानिए