राजस्थान में 400 करोड़ रुपए के कर्ज से जुड़ी प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि) योजना जांच के दायरे में आ गई है। करीब 4 लाख लोगों ने योजना के लिए आवेदन किए। बैंकों ने कर्ज पास भी कर दिए। लेकिन कुछ जानकारी भर कर दोबारा सबमिट करने के लिए फाइलें निकायों को भेजी गई तो निकायों ने पूर्ण करवाने की जगह दबा दी। इस कारण 24 हजार से ज्यादा लोगों के आवेदन पर कर्ज अप्रूव होने पर भी फायदा नहीं मिला। शिकायतें मिली हैं कि रिश्वत बिना फाइलें आगे नहीं बढ़ती। अटका दी जाती हैं। इसी तरह निकायों द्वारा फाइलें दुरुस्त कर सबमिट नहीं करवाए जाने से बैंकों ने 22716 के आवेदन लौटा दिए। 8 हजार से अधिक आवेदन तो निकायों ने अपने स्तर पर ही रिजेक्ट कर दिए। लाखों लोगों से जुड़ी योजना में इस बंटरबाट पर यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा और सचिव रवि जैन खासा नाराज हैं। उन्होंने गड़बड़ वाले निकायों व अफसरों के खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी की है। आवेदन करने वालों से आधे लोगों के खाते में ही ट्रांसफर हुई कर्ज की राशि प्रधानमंत्री स्व निधि योजना में कर्ज के लिए प्रदेश के 3.96 लाख रेहड़ी, थड़ी, पटरी वालों ने आवेदन किया। इनमें से 3.80 लाख आवेदन कर्ज के लिए पात्र मिले। फिर भी 2 लाख 65 हजार 806 बांटने के लिए मंजूरी दी गई और असल में कर्ज का लाभ लेने वाले लाभार्थी घटकर 2 लाख 662 रह गए। 3.58 करोड़ 93 लाख रुपए ही कर्ज बंट पाया। 22716 आवेदन बैंकों ने लौटा दिए। 24 हजार 833 आवेदन निकायों ने पूरे नहीं करवाए। निगम, पालिकाएं जांच के दायरे में
प्रदेश की 33 नगर निगम, नगर पालिकाएं और नगर परिषदों में यह घपला किया गया। इन निकायों ने 10 से कम आवेदन पूरे करवाए और अटकाए रखे। कर्ज पास होने पर भी फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया। 3 माह से लगाए जा रहे जिलों में शिविर
पिछले 3 माह से प्रदेश के 41 जिलों में पीएम स्व निधि के लिए कैंप लगाए गए। अधूरे आवेदनों पर कर्ज नहीं मिला। हालांकि अटकाए गए आवेदन 1 से 3 साल पुराने ज्यादा हैं।
