1967 की बात है, स्कूल की एक परीक्षा में फेल होने के बाद अपने पिता की मार से बचने के लिए एक 13 साल का लड़का पिता के ही वॉलेट से पैसे चुराकर मुंबई जाने वाली बस में चढ़ जाता है। ये वो दौर था जब उडुपी लोगों का कामकाज की तलाश और किस्मत आजमाने के लिए मुंबई जाना सामान्य बात थी। ये लड़का भी अपनी किस्मत आजमाने आया था। शुरू में इसने एक छोटी सी कैंटीन में बर्तन धोने वाले का काम किया। लेकिन उसके सपने बड़े थे। कुछ साल के बाद इस लड़के ने एक रेस्टोरेंट चेन की शुरुआत की, जिसके आज 175 से भी ज्यादा आउटलेट्स हैं, और सालाना कमाई 300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। उस लड़के का नाम है, जयराम बानन, जो सागर रत्ना रेस्टोरेंट के मालिक हैं। जयराम की कहानी किसी फिल्म के हीरो से कम नहीं है।