कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान यूनिवर्सिटी में शस्त्र पूजन का विरोध हुआ, इस दौरान आरएसएस के स्वयंसेवकों ने भी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं से मारपीट की। पायलट ने कहा कि यह सिर्फ पुलिस और प्रशासन का काम नहीं है, कुछ अदृश्य शक्तियां हैं, जो इस पूरे मामले में सरकार और पुलिस पर दबाव बनाए हुए हैं। ये लोग एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड़ को जेल में रखकर एक उदाहरण पेश करना चाहते हैं। जिससे कि कोई दुबारा विरोध की आवाज नहीं उठा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिससे जाखड़ को जमानत नहीं मिल सके। पायलट ने आशंका जताई कि इस मामले में जमानत मिलने पर विनोद जाखड़ को दूसरे मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। सरकार में बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं है
पायलट ने कहा कि विनोद जाखड़ कोई आतंकवादी या हिस्ट्रीशीटर नहीं है। उनके साथ यह बर्ताव साफ दिखाता है कि सरकार की नीतियां दलित विरोधी हैं। सरकार बताना चाहती है कि अगर कोई गरीब-दलित परिवार का बच्चा नेतागिरी करना चाहेगा तो हम उसके साथ यही करेंगे। पायलट ने कहा कि इसी तरह से सोनम वांगचुक ने लद्दाख में सरकार को उनका वादा याद दिलाया तो उन पर एनएसए लगा दिया। बीजेपी सरकारों की नीतियां है कि विरोध करने वालों पर ऐसी धाराएं लगाओ कि उनका मनोबल टूट जाए और दूसरा भी आवाज उठाने का दुस्साहस नहीं कर सके। कफ सिरप मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए
सचिन पायलट ने कहा कि कफ सीरप से बच्चों की मौत का मामला गंभीर है। इस पर सरकार खुद जांच करेगी तो हकीकत सामने नहीं आएगी। इसलिए इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। ताकि सामने आए कि गलती किसकी है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दुबारा हो सकती हैं। इस प्रकार की लापरवाही से अगर बच्चों की जान चली जाए, तो इससे बड़ी दुख की बात क्या होगी।
