पाकिस्तान में बैठी प्रेमिका के झांसे में आकर राजस्थान का एक युवक इंटरनेशनल साइबर ठगी गैंग का सरगना बन गया। हनुमानगढ़ पुलिस ने 1 फरवरी को हरदीप सिंह नाम के युवक को अरेस्ट किया है। महज 10वीं पास हरदीप पाकिस्तान के लाहौर से चल रहे साइबर ठगी गिरोह से संपर्क में था। उसी के इशारे पर करोड़ों की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। आरोपी गांव के लोगों के बैंक अकाउंट किराए पर ले लेता था। फिर पाकिस्तान में बैठे ठग उन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे ट्रांसफर करने में लेते थे। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि इस ठगी गिरोह से उसे पाकिस्तानी गर्लफ्रेंड राबिया ने जोड़ा था। प्रेम जाल में फंसकर हरदीप पिछले साल पाकिस्तान जाने वाला था। उसके लिए वह धर्म बदलने तक को तैयार था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के चलते आवाजाही बंद होने के चलते ऐसा हो नहीं पाया। पुलिस के आशंका है कि इसके पीछे पाकिस्तान का धर्मांतरण साइबर ठगी मॉड्यूल हो सकता है। जम्मू-कश्मीर से भी इसका कनेक्शन सामने आया है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए कैसे इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ। लाहौर से मिलते थे निर्देश- इस खाते में पैसे ट्रांसफर कर दो हरदीप सिंह को 1 फरवरी को हनुमानगढ़ की साइबर थाना पुलिस ने अरेस्ट किया था। पूछताछ में सामने आया कि हरदीप सिंह पाकिस्तान में बैठे साइबर ठग गिरोह के सीधे संपर्क में था और भारत में उनके लिए फाइनेंशियल सहयोगी था। भारतीयों से ठगी का पैसा किस खाते में डलवाना है, कब निकालना है और किस रास्ते से आगे भेजना है- यह सब निर्देश पाकिस्तान के लाहौर से मिलते थे। साइबर पुलिस ने हरदीप से बरामद 3 मोबाइल का डेटा खंगाला है। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी में हरदीप 10 से 20 प्रतिशत कमीशन रखता था। बाकी पैसा हरदीप के किराए पर खरीदे गए बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होते। फिर उन्हें डॉलर में कन्वर्ट कर पाकिस्तान भिजवाया जाता था। दिव्यांग पेंशन खाते में पहुंचा ठगी का पैसा तो खुला राज पूरा मामला तब सामने आया, जब हनुमानगढ़ जिले के डबली राठान निवासी राजपाल सिंह का बैंक खाता अचानक फ्रीज कर दिया गया। राजपाल सिंह पैरालिसिस पीड़ित हैं और उनके खाते में दिव्यांग पेंशन आती थी। पेंशन रुकने पर जब उन्होंने बैंक से संपर्क किया तो पता चला कि उनके खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ी संदिग्ध रकम आई है। जांच में सामने आया कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर साइबर थाने और मध्यप्रदेश के देवास जिले से इस खाते को लेकर नोटिस जारी हुए थे। दरअसल, पुलिस को जम्मू-कश्मीर से संदिग्ध पैसे की लेन-देन के सबूत मिले थे। खुद का खाता ब्लॉक होने का बहाना बनाता था तीन स्टेट (मध्यप्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर) की साइबर पुलिस ने जब जांच बढ़ाई तो पता चला कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी डबली राठान निवासी हरदीप सिंह है। उसने अपने ही गांव और आसपास के इलाकों के लोगों को निशाना बनाया। आरोपी हरदीप सिंह ने अपने पड़ोसी राजपाल सिंह को यह कहकर भरोसे में लिया कि उसका बैंक खाता बंद हो गया है और एक पेमेंट आने वाली है, जिसे वह राजपाल के खाते में डलवा देगा। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम जमा करवाई गई और एटीएम के जरिए निकाल ली गई। राजपाल की शारीरिक मजबूरी का फायदा उठाकर हरदीप ने उनसे एटीएम कार्ड और पिन तक हासिल कर लिया। जांच में सामने आया कि यह कोई एक-दो ट्रांजैक्शन का मामला नहीं था। अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच राजपाल समेत 100 से ज्यादा लोगों के बैंक खाते जुटा लिए थे। इन खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपए की साइबर ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने में किया गया। इन खातों से जुड़े 14 राज्यों से कुल 36 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गई थी। महज 10वीं पास है हरदीप सिंह आरोपी हरदीप सिंह मूल रूप से हनुमानगढ़ के डबली राठान गांव का रहने वाला है। पिता धान मंडी में पल्लेदारी कर परिवार का पेट पालते हैं। हरदीप केवल 10वीं पास है। माता-पिता गांव में रहते हैं लेकिन कुछ समय से हरदीप हनुमानगढ़ शहर में रह रहा था, जहां उसने साइबर ठगी के इस खतरनाक नेटवर्क में कदम रख दिया। पाकिस्तानी लड़की राबिया के झांसे में बन गया ठग जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान के साइबर ठग के संपर्क में आने से पहले हरदीप सिंह एक पाकिस्तानी युवती के संपर्क में था। दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। हरदीप उस युवती से मिलने पाकिस्तान जाना चाहता था और इसके लिए प्रयास भी कर रहा था। लेकिन इस बीच ऑपरेशन सिंदूर हुआ और दोनों तरफ से आवाजाही बंद हो गई। इसके चलते वह पाकिस्तान नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक इस बीच राबिया ने ही हरदीप का संपर्क लाहौर में बैठे अपने किसी परिचित के जरिए साइबर ठगों से कराया। इसके बाद हरदीप उस गिरोह के इशारे पर काम करने लगा था। ऐसे करता था गिरोह काम? जांच में सामने आया कि आरोपी हरदीप सिंह और उसके पाकिस्तान में बैठे साइबर ठग गिरोह के हैंडलर भारत में सोशल मीडिया पर कई तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे थे। आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सस्ता सामान, शेयर मार्केट में निवेश, सस्ता लोन, घर बैठे ऑनलाइन पैसा कमाने जैसे तरीकों से लोगों को झांसे में लेते थे। कट्टरपंथी या धर्मांतरण मॉड्यूल का शक पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि लाहौर में बैठा साइबर ठग हरदीप से निजी बातचीत करता था। उसने हरदीप को बताया था कि वह पहले उसकी ही तरह सरदार था, लेकिन बाद में उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया। इस बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। जांच एजेंसियां अब इस एंगल की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क के पीछे कोई संगठित कट्टरपंथी या धर्मांतरण से जुड़ा साइबर मॉड्यूल तो सक्रिय नहीं है। गांव के लोगों को झांसे में लेता था हरदीप- साइबर पुलिस हनुमानगढ़ के साइबर थानाधिकारी राजपाल सिंह ने बताया- जांच में हरदीप के पाकिस्तानी हैंडलर्स से सीधे संपर्क के ठोस सबूत मिले हैं। आरोपी अपने ही गांव के भोले-भाले मजदूर वर्ग के लोगों को यह कहकर फंसाता था कि उसका बैंक खाता बंद हो चुका है। छोटे-मोटे लालच देकर वह उनके खातों का इस्तेमाल करता था। अशिक्षा और जानकारी के अभाव में लोग उस पर भरोसा कर लेते थे। आरोपी के पाकिस्तानी महिला से प्रेम संबंध भी सामने आए हैं। जिस ठग से वह संपर्क में था, वह उसी महिला के परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। इस आधार पर पूरे गिरोह के तहत साजिश रचे जाने की आशंका है।
