कस्बे के रेफरल अस्पताल में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बिजली का करंट लगने से झुलसे पांच वर्षीय बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां आधा घंटे तक कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। इलाज के अभाव में बच्चे की हालत और बिगड़ती चली गई। बाद में आनन-फानन में अलवर रैफर किया गया, जहां ले जाते समय रास्ते में बच्चे की मौत हो गई।
कस्बा निवासी पवन प्रजापति का पांच वर्षीय पुत्र सुमित घर पर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक खुले बिजली के तार की चपेट में आने से उसे तेज करंट लग गया। परिजन तुरंत उसे गंभीर हालत में पहाड़ी के सरकारी रेफरल अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद करीब आधा घंटे तक बच्चा गंभीर अवस्था में इलाज के बिना अस्पताल की टेबल पर पड़ा रहा। परिजन खुद उसके शरीर की मालिश करते रहे, लेकिन मौके पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। हंगामे की सूचना मिलने पर ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी मंसूर अली ने सोमका अस्पताल से चिकित्सक इरफान को बुलाकर रेफरल अस्पताल में बैठाया। बताया गया कि चिकित्सक करीब एक बजे अस्पताल पहुंचे। ट्रेनिंग और मीटिंग में डॉक्टर, अस्पताल भगवान भरोसे पहाड़ी रेफरल हॉस्पिटल में कुल 22 स्टाफ कर्मी पदस्थ हैं, जिनमें तीन चिकित्सक शामिल हैं। मंगलवार को ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंसूर अली द्वारा अंधवाड़ी चिकित्सा प्रभारी देवेंद्र पालीवाल और रॉफ चिकित्सा प्रभारी भुवनेश जोशी की ड्यूटी पहाड़ी रेफरल हॉस्पिटल में लगाई गई थी। हालांकि, ड्यूटी के बावजूद दोनों चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार, डॉ. भुवनेश जोशी चिकित्सा विभाग की तीन दिवसीय मेंटल ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए जयपुर गए हुए थे। वहीं डॉ. देवेंद्र पालीवाल को जिला हेल्थ सोसायटी की बैठक में बुला लिया गया था। सुबह ही इन दोनों चिकित्सकों की अनुपस्थिति की जानकारी मिलने के बावजूद अस्पताल में वैकल्पिक चिकित्सक की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में रेफरल हॉस्पिटल पर केवल डेंटल चिकित्सक डॉ. आरती धाकड़ और नर्सिंग स्टाफ में करतार सिंह, सुरेन्द्र सिंह व गिरिजा वर्मा ही मौजूद थे। परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में हंगामा चिकित्सक नहीं मिलने से गुस्साए परिजनों और कस्बे के लोगों ने चिकित्सक कार्यालय में तोड़फोड़ कर हंगामा किया। सूचना पर अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस को बुलाया। थाना प्रभारी योगेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे और भीड़ को शांत कराया। हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को गंभीर अवस्था में अलवर रैफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उपखंड अधिकारी को दी शिकायत मृतक बच्चे के ताऊ अशोक कुमार ने उपखंड अधिकारी को शिकायत देकर बताया कि पहाड़ी उपखंड स्तर का अस्पताल होने के बावजूद वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। आधा घंटे तक इलाज नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ी। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। “करंट लगने से पीड़ित पक्ष जिस बच्चे को अस्पताल लेकर आया था, वह मृत अवस्था में था। इसके बावजूद मौके पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ द्वारा ट्रीटमेंट दिया गया। मामले को लेकर विभागीय स्तर पर तथ्यों की जांच की जा रही है।” -विजय बंसल, सीएमएचओ, डीग