भास्कर न्यूज | ब्यावर दो साल बाद रास-ब्यावर-मांडल राज्य राजमार्ग का निर्माण कार्य फिर से गति पकड़ रहा है। 115 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन हाइवे के पूरा होने से पाली, भीलवाड़ा, ब्यावर और नागौर जिलों के बीच यातायात सुगम होगा। यानी मेड़ता से भीलवाड़ा जाने में अब डेढ़ घंटा बचेगा। पहले साढ़े 4 घंटे में यह दूरी हो रही थी। नवंबर 2019 में प्रोजेक्ट का ड्राफ्ट तैयार हुआ और 2022 में काम शुरू किया था, लेकिन तकनीकी कारणों और अन्य बाधाओं के चलते काम को बीच में ही रोकना पड़ा। कार्य के दौरान दो ठेकेदार काम बीच में छोड़ गए। कई महीनों से बंद था। अब ठेकेदार ने सेंदड़ा रोड पर पाली बॉर्डर के पास ग्राम सराधना से निर्माण फिर से शुरू कर दिया है। मार्ग में आने वाली पहाड़ियों को काटकर समतल किया जा रहा है। पहाड़ी के बीच से रास्ता निकालने के लिए मशीनें दिन रात कार्य कर रही हैं। बिलातों का बाड़िया से सराधना तक का काम अब शुरू किया है। बिलातों का बाड़िया से रास तक निर्माण 70% हो चुका है। मार्ग से मांडल, आसींद, बदनौर, ब्यावर, बाबरा, रास, लाम्बिया सीधे मेड़ता मार्ग से जुड़ेंगे। सीमेंट फैक्ट्रियों को होगा सीधा फायदा : यह हाइवे नेशनल हाइवे 48 को जोड़ेगा। इससे जयपुर, जोधपुर और पाली से आने वाले यात्रियों को नागौर और भीलवाड़ा के लिए एक नया और छोटा रास्ता मिलेगा। रास क्षेत्र में स्थित बांगड़ सीमेंट, अंबुजा सीमेंट जैसे बड़े प्लांट के भारी वाहनों को अब शहर के भीतर फंसे बिना चौड़ा रास्ता मिलेगा। मेड़ता जाने वाले यात्रियों को अब ब्यावर शहर के अंदर आने की जरूरत नहीं होगी। सराधना गांव से होते हुए कलाली का बाड़िया, बिलातों का बाड़िया, जगमालपुरा, फतेहगढ़ सल्ला, रूपनगर, बाबरा होते हुए रास तक के ग्रामीणों को लाभ होगा। जगमालपुरा से रास तक की सड़क का अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में छोटे-बड़े पुलों के निर्माण किया जा रहा है। अब मुख्य फोकस ब्यावर और पाली बॉर्डर के बीच के हिस्से को पूरा करना है। हाइवे निर्माण में बड़ी बाधा रेलवे लाइन है। सड़क के बीच में कलालिया का बाड़िया के पास से गुजर रही रेलवे लाइन, डीएफसी लाइन को पार करवाना मुख्य कार्य रहा है। रेलवे लाइन के ऊपर से पुल का निर्माण किया जाएगा। जिसका कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।