हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधान के अनुसार पहली गवाही से 60 दिन में ट्रायल पूरी नहीं होने पर आरोपी को जमानत का लाभ दिया हैं। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने 704 करोड़ रुपए के जीएसटी के मामले में आरोपी अंकित बंसल की जमानत याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र ने कोर्ट को बताया कि बीएनएसएस की धारा 480(6) के तहत गैर-जमानती अपराध में पहली गवाही के 60 दिन के भीतर ट्रायल पूरी नहीं होने पर जमानत दिए जाने का प्रावधान है। इस मामले में बार-बार तारीखों के बावजूद 90 दिन से अधिक समय बाद भी ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं हुई। केन्द्र सरकार ने किया जमानत का विरोध
वहीं, केन्द्र सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह करोड़ो रुपए के आर्थिक अपराध का मामला है और जीएसटी के मामले में विशेष कानूनी प्रावधान हैं। ऐसे में इसे बीएनएसएस के सामान्य प्रावधानों के नजरिए से नहीं देखा जा सकता हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जून 2024 से जेल में है और फरवरी 2025 में प्रसंज्ञान लिया गया, ऐसे में बीएनएसएस की धारा 480 (6) के अंतर्गत जमानत पर विचार किया जा सकता है। बता दे कि जयपुर सेन्ट्रल जेल में बंद आरोपी की दो जमानत याचिकाएं पहले खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने लगाई शर्तें
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के 5 लाख रुपए के निजी मुचलके और 2.5 लाख रुपए के दो जमानत मुचलके पेश करने पर जमानत मंजूर की जाए, वहीं याचिकाकर्ता पर पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा कराने, साक्ष्यों से छेडछाड नहीं करने और हर माह की 25 तारीख को संबंधित थाने में हाजिरी देने की शर्त लगाई हैं।
