पिछले 15 दिन में पशुओं में होने वाले गलघोटू रोग से 30 से ज्यादा गाय-भैंसों की जान चली गई। पशुपालकों का कहना है इस बार दीपावली फीकी जाने वाली है। हमारे बच्चों जैसे पशुओं की मौत के बाद लाखों का नुकसान हो गया है। ग्राहकों को दूध देने के लिए नहीं बचा और आमदनी रुक गई है। इधर, पशुपालन विभाग ने कहा- हमारी जांच में गलघोटू से 16 मवेशियों की मौत होना सामने आया है। मामला पाली जिला मुख्यालय से खारड़ा गांव की तरफ जाने वाले रोड पर होदिया का ढाणा का है। पाली मुख्यालय से करीब 8 KM की दूरी पर आबाद होदिया का ढाणा ने पशुपालकों के सामने ही उनकी गाय-भैंसों ने दम तोड़ दिया। यहां अधिकतर गुर्जर जाति के पशुपालक हैं जो दूध बेचकर अपना गुजारा करते हैं। पिछले 10-15 दिनों में यहां एक के बाद एक कई पशुपालकों की विदेशी नस्ल की गायों से लेकर भैंसों की मौत हो गई। यहां जोधपुर से क्षेत्रीय रोग निदान केंद्र की टीम भी पहुंची, लेकिन की जान नहीं बचाई जा सकी। किसान बोले- साढ़े 5 लाख का नुकसान हुआ होदिया का ढाणा निवासी किसान कन्हैयालाल गुर्जर बताते हैं कि एचएफ नस्ल की विदेशी 4 गाय और मुर्रा नस्ल की 2 भैंसों की एक सप्ताह के भीतर मौत हो गई। भैंस उन्होंने एक-एक लाख रुपए में और 90-90 हजार रुपए में गाय खरीदी थी। गाय रोजाना 20 लीटर और भैंस 15 लीटर दूध देती थी। 6 मवेशियों की मौत होने से उन्हें करीब साढ़े 5 लाख का नुकसान हुआ साथ ही अब ग्राहकों को दूध भी पर्याप्त नहीं दे पा रहे है। दूध का धंधा ठप हो गया है। 30 से ज्यादा पशु 2 सप्ताह में मरे इसी तरह पशुपालक दुदाराम की 3 भैंस और 2 गाय, गोपाल की 3 भैंस और 2 गाय, कालूराम की एक भैंस, गोपाल पुत्र श्रवणराम की तीन गायें, रामकरण की तीन भैंस, 2 गाय, मीठालाल की 3 गाय, 2 भैंस, उगमाराम क 2 गाय, 5 भैंस, राजू की 2 भैंस, 2 गाय की मौत पिछले 10 से 15 दिनों के बीच हो गई। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई। पशु चिकित्सक बोले- हमारी जांच में 16 गलघोटू से मरे मवेशियों की मौत के मामले में पाली पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक मनोज पंवार ने कहा कि गलघोंटू रोग एक जानलेवा रोग है। जो ज्यादातर भैंसों में होता है। जिसे बुखार आने के बाद गले में गांठ बन जाती है और सांस लेने में दिक्कत होने के कारण दिक्कत होती है। जिससे पशु की जान चली जाती है। इस रोग का जब तक पता चलता है पशु की हालत काफी खराब हो जाती है और उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। हमारे गणना के अनुसार 16 पशु गलघोटू रोग से मरे हैं। विधायक से की मुआवजा दिलाने की मांग सोमवार को पाली विधायक भीमराज भाटी होदिया का ढाणा पहुंचे। जहां वे किसानों से मिले। तो उन्होंने का दर्द फूट पड़ा। बोले कि पशुओं की मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया। अब सरकार से कुछ मुआवजा दिलाओ को राहत मिले। इस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उनकी पीड़ा प्रशासन तक पहुंचाएंगे और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई करेंगे। क्या है गलघोंटू रोग?
गलघोंटू एक पशु रोग है, इसका असर गाय और भैंस से लेकर भेड़ों में भी देखा जाता है। पशु को तेज भुखार, सांस लेने में परेशानी, गले और गर्दन की जगह सूजन और मुंह से लार गिरना इस रोग के लक्षण हो सकते हैं। क्यों फैलता है रोग
बारिश के सीजन में इस रोग का संक्रमण अधिक देखा जाता है। यह एक संक्रामक रोग है यानी एक बीमार पशु से यह रोग दूसरे पशु को भी बीमार रखने की क्षमता रखता है। इस रोग से बचने के लिए अपने पशुओं को साफ पानी और चारा खिलाने की सलाह दी जाती है।
