उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कांठ कस्बे में एक अमृतधारी सिख छात्र को ककार पहनकर बीए की परीक्षा देने से रोके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। पीड़ित छात्र की पहचान काका जपन सिंह के रूप में हुई है, जिसे परीक्षा केंद्र में किरपान पहनने के कारण परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही SGPC ने सिख मिशन हापुड़ के इंचार्ज ब्रिजपाल सिंह की अगुवाई में एक टीम को संबंधित कॉलेज में जांच के लिए भेजा। धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला: धामी अमृतसर स्थित SGPC कार्यालय से जारी बयान में एडवोकेट धामी ने कहा कि यह मामला सिख धार्मिक भावनाओं से जुड़ा बेहद गंभीर है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी प्रिंसिपल और शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ककार सिख जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा: SGPC धामी ने कहा कि ककार सिख जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं और भारतीय संविधान सिखों को इन्हें धारण करने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में सिख छात्रों को परीक्षाओं के दौरान बार-बार परेशान किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। जानबूझकर हो रहा भेदभाव स्वीकार्य नहीं: धामी उन्होंने कहा कि SGPC इस मुद्दे को लेकर पहले भी केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को कई बार लिख चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जानबूझकर सिख विद्यार्थियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। SGPC अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शिरोमणि कमेटी उत्तर प्रदेश सरकार तक पहुंच बनाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।