वर्तमान पीढ़ी को परिक्रमा का वातावरण समझने की जरूरत है। जिस मूर्ति की परिक्रमा की जाती है, उसमें प्राण प्रतिष्ठित होते हैं। लोग जब परिक्रमा करते हैं तो शरीर उस मूर्ति के आभामंडल से निकलता। यही कारण होता है, लोग बीमार नहीं होते थे। परिक्रमा के केंद्र में जो है वह सत्य की मूर्ति है।
