पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारी आज जालंधर डिपो के एक ड्राइवर की मौत के बाद हड़ताल पर हैं। कर्मचारी सरकार पर मृतक ड्राइवर के परिवार की सुध न लेने और मुआवजे को लेकर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। यह प्रदर्शन जालंधर 01 डिपो के ड्राइवर की कुराली में एक झगड़े के दौरान हुई मौत के बाद शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इससे पहले संगरूर हलके में, जो मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है, किलोमीटर स्कीम के तहत कार्यरत एक बस ड्राइवर की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस समय मुख्यमंत्री ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। कर्मचारियों के अनुसार, वह ड्राइवर उनके विभाग की किसी भी शाखा से संबंधित नहीं था। सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण हालांकि, अब जब जालंधर डिपो के एक ड्राइवर की झगड़े के दौरान मौत हो गई है, तो मुख्यमंत्री की ओर से उसके परिवार के लिए किसी भी तरह की सहायता की घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार का यह रवैया भेदभावपूर्ण है। कर्मचारियों की मांग है कि जिस प्रकार किलोमीटर स्कीम के ड्राइवर के परिवार को 50 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई थी, उसी तर्ज पर जालंधर डिपो के मृतक ड्राइवर के परिवार को भी 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाए ताकि परिवार का भरण-पोषण सुचारु रूप से हो सके।