अमृतसर पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को पंजाब का हेल्थ मिनिस्टर बताकर सरकारी अधिकारियों से अपना काम निकलवाने की कोशिश की। उसने सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) को फोन कर कुछ चुनिंदा लोगों को अस्पताल में नौकरी पर बनाए रखने और कुछ को निकाल देने के आदेश दिए। फोन पर आरोपी ने SMO को काम को लेकर धमकाया भी। हालांकि, जब SMO ने उस नंबर पर दोबारा फोन किया तो आरोपी पलट गया और उसने खुद को हेल्थ मिनिस्टर के ऑफिस का कर्मचारी बताया। इससे SMO को शक हुआ तो CMO को इसकी जानकारी दी। CMO ने डायरेक्ट हेल्थ मिनिस्टर से बात कर पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने आरोपी को रेड मारकर उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह प्राइवेट गोताखोर है। अस्पताल में तैनात अपने बेटे की नौकरी बचाने के लिए उसने ऐसा किया। हालांकि, पुलिस रिकॉर्ड में पहले से ही उसके खिलाफ ठगी के 6 मामले दर्ज हैं। आरोपी अदालत को भी ठगने की कोशिश कर चुका है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। DCP ने बताई ठगी की पूरी कहानी… अब जानिए, आरोपी पर पहले दर्ज मामले… अदालत से ठगी की कोशिश की
एक मामले में आरोपी ने अदालत के साथ ही धोखाधड़ी करने की कोशिश की। 30 अक्टूबर 2024 को थाना रामबाग में दर्ज धोखाधड़ी के एक केस में आरोपी ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की। अमृतसर ट्रायल कोर्ट में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 6 लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का आदेश दिया। आरोपी ने बैंक से 6 लाख का डिमांड ड्राफ्ट बनवाया। लेकिन उसी दिन बैंक को यह कहते हुए इसे रद्द करवा दिया कि वह खो गया है। ड्राफ्ट रद्द होते ही 6 लाख रुपए उसके बचत खाते में वापस आ गए। बैंक रिकॉर्ड में ड्राफ्ट रद्द हो चुका था तो अदालत में जमा किया गया डिमांड ड्राफ्ट केवल एक कागज का टुकड़ा रह गया था।
